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मंगलवार, 13 सितंबर 2016

दस दोहे "हिन्दी का गुणगान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आओ हिन्दी दिवस पर, प्रण करलें हम आज।
हिन्दी भाषा में हमें, करने हैं सब काज।१।
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ले जाना है विश्व में, हिन्दी का अभियान।
हिन्दी से हो जगत में, भारत की पहचान।२।
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तुलसी, सूर-कबीर की, वाणी है अनमोल।
देवनागरी के हमें, मीठे लगते बोल।३।
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हिन्दी भाषा का नहीं, कोई है पर्याय।
सुधरे सबकी वर्तनी, ऐसे करो उपाय।४।
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सम्बोधन जिसके करें, सबको भावविभोर।
लहरों में सम्बन्ध के, होता हृदय हिलोर।५।
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बिन्दी से होता सदा, माँ का अटल सुहाग।
हिन्दी से अब कीजिए, प्यार और अनुराग।६।
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उर्दू का नुक़्ता बने, हिन्दी की पहचान।
लिखने-पढ़ने में सरल, हिन्दी का विज्ञान।७।
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देवनागरी में रचे, वेदों के सब मन्त्र।
भाषा के आधार पर, टिका हुआ जनतन्त्र।८।
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भजन-कीर्तन-आरती, सब हिन्दी में होय।
तन-मन को निर्मल करे, योग-ध्यान का तोय।९।
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एक दिवस ही क्यों करें, हिन्दी का सम्मान।।
प्रतिदिन होना चाहिए, हिन्दी का गुणगान।१०।

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