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बुधवार, 14 सितंबर 2016

गीत "भारतमाता के सुहाग की हिन्दी पावन बिन्दी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों! 
आज हिन्दी दिवस है।
इस अवसर पर मेरा यह गीत सुनिए।
जिसे अपना स्वर दिया है
श्रीमती अर्चना चाव जी ने.
   
भारतमाता के सुहाग कीजो है पावन बिन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारीहै अपनी भाषा हिन्दी।।

भरी हुई है वैज्ञानिकताव्यञ्जन और स्वरों में,
उच्चारण में बहुत सरलताइसके सभी अक्षरों में,
ब्रज-गोकुल में बसी हुई होबनकर जो कालिन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारीहै अपनी भाषा हिन्दी।।

सन्तों के कण्ठों से उपजीमीठी-मीठी सुरसवती हो,
वीणा की झंकार सुनातीसरस्वती सी सरसवती हो,
शीतल मन्द सुगन्ध पवन सी, तुम बयार हो आनन्दी।
भोली-भाली सबसे प्यारीहै अपनी भाषा हिन्दी।।

अपनी हिन्दी भाषा काकण-कण वन्दन करता है,
देवनागरी का जन-गणमन से अभिनन्दन करता है,
इतना होने पर भी इंग्लिश भारत में क्यों जिन्दी?
भोली-भाली सबसे प्यारीहै अपनी भाषा हिन्दी।।

1 टिप्पणी:

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