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शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

गीत "जुल्म के आगे न झुकेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

Image result for साबुन से धोया हमने गधों को हजार बार,
हमने बनाए जिन्दगी में कुछ उसूल हैं।
गर प्यार से मिले तो जहर भी कुबूल है।।

हमने तो पड़ोसी को अभय-दान दिया है,
दुश्मन को दोस्त जैसा सदा मान दिया है,
बस हमसे बार-बार हुई ये ही भूल है।
गर प्यार से मिले तो जहर भी कुबूल है।।

साबुन से धोया हमने गधों को हजार बार,
लेकिन कभी न आया उनमें गाय सा निखार,
क्यों पथ में बार-बार बिछाते वो शूल हैं।
गर प्यार से मिले तो जहर भी कुबूल है।।

हम जोर-जुल्म के कभी आगे न झुकेंगे,
जल-जलों तूफान से डर कर न रुकेंगे,
खारों को हमने मान लिया सिर्फ फूल है।
गर प्यार से मिले तो जहर भी कुबूल है।।
 

5 टिप्‍पणियां:

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