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मंगलवार, 20 सितंबर 2016

दोहे "मत करना अब माफ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दशकों से आतंक को, देश रहा है झेल।
सही समय अब आ गया, मेटो इनका खेल।।
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करो चढ़ाई पाक पर, रचो नया भूगोल।
नक्शे पर से कीजिए, नाम पाक का गोल।।
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पूरी दुनिया मानती, जिसको दहशतगर्द।
ऐसे दहशतगर्द का, कौन बने हमदर्द।।
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जिसकी नस-नस में भरा, मक्कारी का खून।
जिबह करो उस जीव को, रचो नया कानून।।
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चाहे कुछ अंजाम हो, मत करना अब माफ।
खेती झूठ-फरेब की, जड़ से करना साफ।।
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विषधर का फन कुचलना, इंसानों का काम।
पागल के मुख पर कसो, ढँग से आज लगाम।।
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सीना छप्पन इंच का, कब आयेगा काम।
रावण जैसे पाक को, मारो अब हे राम।।

2 टिप्‍पणियां:

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