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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

"मेरे मंजुल भाव" मेरी श्रीमती का जन्मदिन (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मंजुल माला के लिए, लाया सुमन समेट।
श्रीमती का जन्मदिन, दूँगा उनको भेंट।।
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यज्ञ-हवन करके करूँ, विधना से फरियाद।
सजनी के संसार में, कभी न हो अवसाद।।
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उपवन में मंगल रहे, खिलें खुशी के फूल।
ग्रह और नक्षत्र सब, रहें सदा अनुकूल।।
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उम्र हुई है आपकी, पूरे बासठ साल।
लेकिन अब भी मोरनी, जैसी ही है चाल।।
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जितना दाता ने दिया, करो उसे उपभोग।
जब तक है यह जिन्दगी, तब तक रहो निरोग।।
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भरे हुए हैं हृदय में, मेरे मंजुल भाव।
अन्त समय तक भी रहे, सखाभाव-समभाव।।
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साधारण आहार से, सभी लोग हैं पुष्ट।
अपनी चादर में हुए, परिवारी सन्तुष्ट।।
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बेटे भी शालीन हैं, बहुएँ मिलीं कुलीन।
किलकारी की गूँज में, रहते हम तल्लीन।।



3 टिप्‍पणियां:

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