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बुधवार, 14 सितंबर 2016

मेरी कार का जन्मदिन "कार हमारी हमको भाती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी कार बहुत मतवाली।
कभी न धोखा देने वाली।।


हिन्दीदिन पर इसको लाये।
हम सब मन में थे हर्षाये।।


आज सातवाँ जन्मदिवस है।
लेकिन अब भी जस की तस है।।

इसको जल से नहलाता हूँ।
कपड़ा लेकर सहलाता हूँ।

इसका ध्यान हमेशा धरता।
आलस को मैं कभी न करता।।

मेरी है यह सखा-सहेली।
अब तक है ये नयी-नवेली।।

कदम-कदम पर साथ निभाती।
कार हमारी हमको भाती।।

सदा सँवारो सबका जीवन।
चाहे जड़ हो या हो चेतन।।

तुम हो सबके मन को भायी।
जन्मदिवस पर तुम्हें बधायी।।

2 टिप्‍पणियां:

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