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रविवार, 1 जनवरी 2017

एक मुक्तक-पाँच दोहे "नववर्ष" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

देश-दुनिया में पसरा हुआ हर्ष हो,
देशभक्ति के ज़ज़्बे का उत्कर्ष हो।
धानी धरती हमेशा रहे उर्वरा,
आप सबको मुबारक नया वर्ष हो।।
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देखो फिर से आ गया, नया-नवेला साल।
आशाएँ मन में जगीं, सुधरेंगे अब हाल।।
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होगा नूतन साल में, जीवन में उल्लास।
पल भर में ही हो गया, गया साल इतिहास।।
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नये साल में सभी से, हों अच्छे सम्बन्ध।
जिससे हो सबका भला, करें वही अनुबन्ध।।
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अपना भारत देश तो, माँगे सबकी खैर।
किसी देश से भी कभी, नहीं चाहता बैर।।
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चैन-अमन होते सदा, जीवन के पर्याय।
आतंकी आयें नहीं, ऐसे करो उपाय।।



1 टिप्पणी:

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