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शनिवार, 21 जनवरी 2017

बालगीत "पढ़ने में भी ध्यान लगाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


मौसम कितना हुआ सुहाना।
रंग-बिरंगे सुमन सुहाते।
सरसों ने पहना पीताम्बर,
गेहूँ के बिरुए लहराते।।

दिवस बढ़े हैं शीत घटा है,
नभ से कुहरा-धुंध छटा है,
पक्षी कलरव राग सुनाते।

काँधों पर काँवड़ें सजी हैं,
बम भोले की धूम मची है,
शिवशंकर को सभी रिझाते।

तन-मन में मस्ती छाई है,
अपनी बेरी गदराई है,
सभी झूमकर हँसते गाते।

निर्मल है नदियों का पानी,
पेड़ों पर छा गई जवानी,
खुश हो करके ये इठलाते।

बच्चों अब मत समय गँवाओ,
पढ़ने में भी ध्यान लगाओ,
सीख काम की हम सिखलाते।

प्रतिदिन पुस्तक को दुहराओ,
पास परीक्षा में हो जाओ,
श्रम से सभी सफलता पाते।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर सार्थक बाल रचना प्रस्तुति
    आजकल बच्चों की परीक्षा के साथ ही अपनी परीक्षा के भी दिन हैं

    उत्तर देंहटाएं

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