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मंगलवार, 31 जनवरी 2017

वन्दना "माँ अमल-धवल कर दो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


 
 माँ मेरी झोली मेंकुछ शब्द सरल भर दो। 
गीतों के सागर सेसब दूर गरल कर दो।।
 
दिन-रात तपस्या कर
मैंने पूजा तुमको
जीवन भर का मेरासंधान सफल कर दो। 
गीतों के सागर सेसब दूर गरल कर दो।।
 
कुछ भी तो नहीं मेरा
माँ सब कुछ है तेरा
इस रीती गागर में निज स्नेह सबल भर दो। 
गीतों के सागर सेसब दूर गरल कर दो।।
 
लिखता हूँ जो कुछ मैं
वो धूमिल हो जाता
अपनी स्याही से तुम, अक्षर उज्जवल कर दो।
गीतों के सागर सेसब दूर गरल कर दो।।
 
जितना माँगा मैंने
उससे है अधिक दिया
मनके मनकों को तुममाँ अमल-धवल कर दो। 
गीतों के सागर सेसब दूर गरल कर दो।।

2 टिप्‍पणियां:

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