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गुरुवार, 12 जनवरी 2017

दोहे "लोहड़ी पर्व-भँगड़ा करते लोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


नये साल का आगमन, लाया है सौगात।
पर्व लोहड़ी में करो, सबसे मीठी बात।।
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कुदरत ने हमको दिया, षड् ऋतुओं का दान।
खेतों ने पहना हुआ, पीताम्बर परिधान।
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मास जनवरी में हुआ, परबत पर हिमपात।
मूँगफली औरेबड़ी, की बाँटो सौगात।।
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सरदी में अच्छा लगे, खिचड़ी का आहार।
तिल के लड़डू खाइए, कहता है त्यौहार।।
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उत्तरायणी-लोहड़ी, देती है सन्देश।
थोड़े दिन के बाद में, सुधरेगा परिवेश।।
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झड़बेरी पर छा गये, खट्टे-मीठे बेर।
धूप सेंकने कोकिला, बैठ गयी मुंडेर।।
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सरसों फूली खेत में, लहर-लहर लहराय।
षटपद औ मधुमक्खियाँ, गुन-गुन गीत सुनाय।।
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मिलजुल कर सब प्रेम से, भँगड़ा करते लोग।
लोहड़ी में उत्साह से, लगा रहे हैं भोग।।


2 टिप्‍पणियां:

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