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मंगलवार, 10 जनवरी 2017

दोहे "विश्व हिन्दीदिवस-मान रहा संसार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दुनिया में हिन्दीदिवस, भारत की है शान।
सारे जग में बन गयी, हिन्दी की पहचान।।
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चारों तरफ मची हुई, अब हिन्दी की धूम।
भारतवासी शान से, रहे खुशी में झूम।।
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हिन्दी है सबसे सरल, मान रहा संसार।
वैज्ञानिकता से भरा, हिन्दी का भण्डार।।
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युगों-युगों से चल रहे, काल-खण्ड औकल्प।
देवनागरी का नहीं, दूजा बना विकल्प।।
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गद्य-पद्य से युक्त है, हिन्दी का साहित्य।
भाषा के परिवेश में, भरा हुआ लालित्य।।
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अपने प्यारे देश में, समझो तभी सुराज।
अपनी भाषा में करे, जब हम अपने काज।।
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हिन्दी के अस्तित्व को, जग करता मंजूर।
भारतवासी जा रहे, लेकिन इससे दूर।।
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जैसा लिक्खा जायगा, वैसा बोला जाय।
भाषाओं में दूसरी, यह गुण नजर न आय।।
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अंग्रेजी का मित्रवर, छोड़ो अब व्यामोह।
अपनी भाषा के लिए, करो न ऊहा-पोह।।

5 टिप्‍पणियां:

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