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शनिवार, 1 अगस्त 2009

‘‘जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।


पेड़ अभिमान में थे अकड़ कर खड़े,
एक झोंके में वो धम्म से गिर पड़े,
लोच वालो का होता नही है दमन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।

सख्त चट्टान पल में दरकने लगी,
जल की धारा के संग में लुढ़कने लगी,
छोड़ देना पड़ा कंकड़ों को वतन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।


घास कोमल है लहरा रही शान से,
सबको देती सलामी बड़े मान से,
आँधी तूफान में भी सलामत है तन।
जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

22 टिप्‍पणियां:

  1. लोच वालो का होता नहीं दमन
    जो घमंडी है उनका हे होता है पतन... वाह बहुत खूब !

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. घास कोमल है लहरा रही शान से,
    सबको देती सलामी बड़े मान से,
    आँधी तूफान में भी सलामत है तन।
    जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।

    बहुत खूबसूरत कविता...भाव भी अच्छे हैं

    जवाब देंहटाएं
  4. mayमंक जी बिलकुल सची बात कही आपकी सीख याद रखने वाली है बधाई आभार्

    जवाब देंहटाएं
  5. घास कोमल है लहरा रही शान से,
    सबको देती सलामी बड़े मान से,
    सही कहा है कोमलता ही तो है जो समय के प्रहार को आसानी से सह लेती है.
    बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  6. bahut hi sundar vichaar!

    jo komal hain saral hain un sabko mera naman.
    jo dambhi hain ghamandi hain hoga unka patan.

    जवाब देंहटाएं
  7. क्या ग़ज़ब का भाव है,,
    शब्दों का सुंदर प्रयोग,
    कविता देती है संदेश,
    करो विनम्रता का उपयोग..

    अगर घमण्ड का लग गया रोग.
    समझो निश्चित पतन आपकी..
    सुंदर वाणी सबसे बोलो..
    सुखमय होगी जीवन आपकी..

    जवाब देंहटाएं
  8. bahut hi sundar vichaar!

    jo komal hain saral hain un sabko mera naman.
    jo dambhi hain ghamandi hain hoga unka patan.

    जवाब देंहटाएं
  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. bahut hi sundar vichaar!

    jo komal hain saral hain un sabko mera naman.
    jo dambhi hain ghamandi hain hoga unka patan.

    जवाब देंहटाएं
  11. सच को बयान करती आपकी लाजवाब रचना.......... शास्त्री जी..आपकी हर रचन कुछ न कुछ सन्देश देती है.........जो कमाल की बात है

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत बढिया रचना लिखी है।बधाई।

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  13. आपकी पोस्ट पढ़कर राहत इंदौरी साहब का एक शे'र यद आया है -

    हवा मगरूर दरख्तों को पटक जएगी.
    बचेगी शाख वही जो कि लचक जाएगी.

    जवाब देंहटाएं
  14. फलों से लदा वृक्ष ही झुका होता है। विनम्रता भी शिक्षा और संस्कार के फलों से लदने पर ही आती है।

    अच्छी कविता... साधुवाद।

    जवाब देंहटाएं
  15. bahut hi shikshaprad kavita .........gahre bhavon se pariporna.

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  16. सही कहा आपने पतन उसका ही होता है जो घमंडी होता है।

    जवाब देंहटाएं
  17. बिल्कुल सही फ़रमाया आपने ! सच्चाई का बयान किया है ! मुझे तो घमंडी लोगों से सख्त नफरत है !

    जवाब देंहटाएं

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