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शनिवार, 29 अगस्त 2009

’’अगर हो सके तो इशारे समझना’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


इशारों-इशारों में हम कह रहे हैं,
अगर हो सके तो इशारे समझना।


मेरे भाव अल्फाज बन बह रहे हैं,
नजाकत समझना नजारे समझना।
अगर हो सके तो इशारे समझना।।


शजर काट नंगा बदन कर रहे हैं,
मझधार को मत किनारे समझना।
अगर हो सके तो इशारे समझना।।


समाया दिमागों में दूषित प्रदूषण,
दरिया को गन्दे ही धारे समझना।
अगर हो सके तो इशारे समझना।।


कहर बो रहे हैं, जहर खा रहे हैं,
बशर सारे किस्मत के मारे समझना
अगर हो सके तो इशारे समझना।।


जो तूती की आवाज को मन्द कर दें,
उन्हें ढोल-ताशे , नगारे समझना
अगर हो सके तो इशारे समझना।।


जिसे पाक माना था नापाक निकला,
ये माथे का काजल हमारे समझना।
अगर हो सके तो इशारे समझना।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. जिसे पाक माना था नापाक निकला,
    ये माथे का काजल हमारे समझाना।

    खूबसूरत पंक्तियाँ शास्त्री जी। इशारे इशारे में अच्छी बातें कह गए।

    जवाब देंहटाएं
  2. जो तूती की आवाज को मन्द कर दें,
    उन्हें ढोल-ताशे , नगारे समझना
    कितनी खूबसूरती से आपने बात कही है. भाव उम्दा.
    बेहतरीन रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. इशारो की भाषा इशारो में ही....
    वाह बात ही निराली.....
    "मझधार को मत किनारे समझना।"
    इशारो में ही हम कुछ पा भी गए.....
    सुंदर रचना......

    जवाब देंहटाएं
  4. जिसे पाक माना था नापाक निकला,
    ये माथे का काजल हमारे समझाना।
    उम्दा शेर है.

    जवाब देंहटाएं
  5. समझनेवाले समझ गए आपका इशारा .. बहुत बढिया !!

    जवाब देंहटाएं
  6. जिसे पाक माना था नापाक निकला,
    ये माथे का काजल हमारे समझाना।

    --बहुत बढ़िया समझाया.

    जवाब देंहटाएं
  7. "जिसे पाक माना था नापाक निकला,
    ये माथे का काजल हमारे समझाना। "

    बढिया !!

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही बढ़िया इशारों को इशारों से समझो
    जो तूती की आवाज को मन्द कर दें,
    उन्हें ढोल-ताशे , नगारे समझना
    बहुत ही उम्दा।

    जवाब देंहटाएं
  9. शास्त्रीजी,
    इशारो में बहुत कुछ कह गए आप--
    जो तूती की आवाज को मन्द कर दें,
    उन्हें ढोल-ताशे , नगारे समझना...
    अच्छी प्रस्तुति... इशारों पर छोडे गए तीर निशाने पर लगे हैं... बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  10. bahut hi zabardast rachna dali hai is baar ...........har baat kahni jaroori nhi hoti ishare hi kafi hote hain......waah kya baat hai.

    जवाब देंहटाएं
  11. कहर बो रहे हैं, जहर खा रहे हैं,
    बशर सारे किस्मत के मारे समझना
    अगर हो सके तो इशारे समझना।।
    लाजवाब
    जो तूती की आवाज को मन्द कर दें,
    उन्हें ढोल-ताशे , नगारे समझना
    सच है बहुत सुन्दरता से इतनी गहरी बात कही है बधाई आभार्

    जवाब देंहटाएं
  12. क्या बात है, भई वाह! आपकी इन पंक्तियों पर यह कहने का जी चाह रहा है।
    ............................

    अक्ल रख दी गिरवी
    ख्वाब दिखाने वालों के पास
    नयी सोच से घबड़ाते है
    करते अवतार की आस
    ऐसे लोग क्या इशारा समझेंगे।
    किनारे पर ही खड़े
    जो लहरों की अठखेलियां देख डर रहे हैं
    वह मझदार में उनके तूफान से क्या लड़ेंगे।
    ....................................
    दीपक भारतदीप

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत ही खूबसूरती से आपने रचना के दौरान समझाया है और समझने वाले इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझ गए !

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत कुछ समझ आए ये इशारे :) .. हैपी ब्लॉगिंग

    जवाब देंहटाएं

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