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सोमवार, 10 अगस्त 2009

‘‘मैंने मदद को पुकारा नही’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे आँगन में उतरे सितारे बहुत,

किन्तु मैंने मदद को पुकारा नही।


तक रहे थे मुझे हसरतों से बहुत,

मैंने हाँ भी न की और नकारा नही।


मेरी खुद्दारियाँ आड़े आतीं रहीं,

मैंने माँगा किसी से सहारा नही।


बस इसी बात का ही तो अफसोस है,

जो हमारा था वो भी हमारा नही।


अपने गम आँसुओं में बहाते रहे,

हमने तन और मन को सँवारा नही।


बन्दगी में कहा मैंने कुछ भी नही,

इसलिए उसने सोचा विचारा नही।


बन गई टिप्पणी में गज़ल ये सजल,

बून्द छोटी सी है जल की धारा नही।

23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...वाह....
    धन्य हो मयंक जी।
    जब टिप्पणी में ही इतनी खूबसूरत
    गजल उतरेंगी,
    तो मन लगा कर लिखोगे तो
    जरूर मोती बरसेंगे।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  2. क्या बात है! बहुत सुंदर रचना! आपकी तारीफ के लिए शब्द कम पर गए!

    जवाब देंहटाएं
  3. "मेरी खुद्दारियाँ आड़े आतीं रहीं,

    मैंने माँगा किसी से सहारा नही।"

    धन्य हो 'मयंक' जी।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह मयकं जी, इस रचना के लिए तो बस एक हि शब्द है" लाजवाब"।

    जवाब देंहटाएं
  5. मयंक जी,बहुत बढिया रचना है।बधाई स्वीकारें।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  7. किसी दिन अपनी आवाज में भी सुनाइये तो और खूबसूरत लगेंगी.

    जवाब देंहटाएं
  8. मेरी खुद्दारियाँ आड़े आतीं रहीं,
    मैंने माँगा किसी से सहारा नही

    शास्त्री जी........... नमस्कार........... बातों ही बातों में गहरी बात कहना आपकी आदत है ................ लाजवाब लिखा है.......

    जवाब देंहटाएं
  9. waah ..........bahut badhiya likha hai.........ek alag hi andaaz mein.

    जवाब देंहटाएं
  10. मेरी खुद्दारियाँ आड़े आतीं रहीं,
    मैंने माँगा किसी से सहारा नही
    मयंक जी क्या सुन्दर बात कही है आपको बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  11. bahot khoob! apki rachna ka yah prabhav hai ki mujhe kitni achchhi lagi.badhai!

    bas yahi ek khushi ki baat hai ki jeevan kisi ke sahare gujara nahin
    jo mila usko seene se lagaya maine par kiya kabhi kisi ko ishara nahin

    जवाब देंहटाएं
  12. सारतत्वों की बात करें तो यह रचना बहुत अच्छी बन पड़ी है. मेरी बधाई भी स्वीकार करें ! आपकी खुद्दारी को सलाम करना पड़ेगा...

    जवाब देंहटाएं
  13. वाह ! क्या बात है.. बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं

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