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शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

‘‘आज जरूरत है प्रताप जैसे तेवर अपनाने की’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)




माँ मुझको ताकत देना, कुछ अभिनव छन्द बनाने की।
आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
नौनिहाल पादप जीवन बगिया में मुरझाये हैं,
आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

मँहगाई की चक्की में, निर्धन जन पिसते जाते हैं,
ढोंगी सन्त-महन्त मजे से, चन्दन घिसते जाते हैं,
आज जरूरत रावण से, सीता की लाज बचाने की।
आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

राम-कृष्ण की मर्यादा का ध्यान हमें धरना है,
दानव और दुर्दान्त-द्रोहियों का मर्दन करना है,
आज जरूरत है प्रताप जैसे तेवर अपनाने की।
आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

12 टिप्‍पणियां:

  1. आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
    नौनिहाल पादप जीवन बगिया में मुरझाये हैं,
    आज जरूरत है इस धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

    बहुत सुन्दर !

    जवाब देंहटाएं
  2. मँहगाई की चक्की में, निर्धन जन पिसते जाते हैं,
    ढोंगी सन्त-महन्त मजे से, चन्दन घिसते जाते हैं,
    आज जरूरत रावण से, सीता की लाज बचाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।


    bahut sundar bhav hain........halat ka sahi chitran kiya hai..........aapki mehnat safal ho yahi kamna hai...........badhayi.

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही बढ़िया कविता | आज के समय के अनुसार सटीक विचारो से भरी हुयी |
    बहुत बहुत बधाई |

    जवाब देंहटाएं
  4. सटीक और सामयिक ..बहुत सुन्दर.

    जवाब देंहटाएं
  5. मँहगाई की चक्की में, निर्धन जन पिसते जाते हैं,
    ढोंगी सन्त-महन्त मजे से, चन्दन घिसते जाते हैं।


    सही बात है। आपने कविता के जरिए यथार्थ का उदघाटन किया है। आभार।

    देसी एडीटर
    खेती-बाड़ी

    जवाब देंहटाएं
  6. आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
    नौनिहाल पादप जीवन बगिया में मुरझाये हैं,
    आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

    BAHUT PYARI RACHNA .BADHAI!!

    जवाब देंहटाएं
  7. आज जरूरत है प्रताप जैसे तेवर अपनाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।
    बिलकुल सही कहा आप ने
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. राम-कृष्ण की मर्यादा का ध्यान हमें धरना है,
    दानव और दुर्दान्त-द्रोहियों का मर्दन करना है,
    आज जरूरत है प्रताप जैसे तेवर अपनाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।
    बहुत सुन्दर और प्रेरणाप्रद प्रस्तुति के लिये बधाई

    जवाब देंहटाएं
  9. आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।

    सत्य बचन | वाह क्या उत्तम भावः हैं ...

    साधू!!

    जवाब देंहटाएं

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