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मंगलवार, 20 नवंबर 2012

"विविध दोहावली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
जो मन में हो आपके, लिखो उसी पर लेख।
बिना छंद तुकबन्दियाँ, बन जाती आलेख।१।

मन पंछी उन्मुक्त है, इसकी बात न मान।
जीवन एक यथार्थ है, इसको लेना जान।२।

रवि की किरणें दे रहीं, जग को जीवन दान।
पाकर धवल प्रकाश को, मिल जाता गुण-ज्ञान।३।

श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।४।

जीवन इक त्यौहार है, जानो इसका सार।
प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार।५।

तम हरने के वास्ते, खुद को रहा जलाय।
दीपक काली रात को, आलोकित कर जाय।६।

अमर शहीदों का कभी, मत करना अपमान।
किया इन्होंने देशहित, अपना तन बलिदान।७।

बिल्ले रखवाली करें, गूँगे राग सुनाय।
अब तो अपने देश में, अन्धे राह बताय।८।

सूखे रेगिस्तान में, जल नहीं हासिल होय।
ख्वाबों के संसार में, जीना दूभर होय।९।

छात्र और शिक्षक जहाँ, करते उलटे काज।
फिर कैसे बन पायेगा, उन्नत देश-समाज।१०।

गुलदस्ते में अमन के, अमन हो गया गोल।
कौन हमारे चमन में, छिड़क रहा विषघोल।११।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्ले रखवाली करें, गूँगे राग सुनाय।
    अब तो अपने देश में, अन्धे राह बताय।७।

    बहुत सटीक बहुत प्रासंगिक दोहे , चर्च की एजेंट है यह बिल्ली, मामूली नहीं है ये पूसी ,करती रहती नित हुस हुस हुस हुस ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सभी दोहे बहुत अच्छे ...विविध रंग लिए हुये

    जो मन में हो आपके, लिखो उसी पर लेख।
    बिना छंद तुकबन्दियाँ, बन जाती आलेख।१।

    ____________

    बिना छंद तुकबंदियाँ लाएँ भाव अनेक
    मन के व्याकुल भाव को बतलाए हर एक ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके इस प्रविष्टी की चर्चा बुधवार (21-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  4. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही अच्छी रचना
    सभी दोहे विविध सन्देश कहते हुए...
    बहुत बेहतरीन...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर शास्त्री जी...
    लाजवाब दोहे...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  7. भक्त पापधी पानि-शत, करें प्रदूषित पानि ।
    पानिप घटती पानि की, बनता बड़ा सयानि ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. फैलाए आँखे कुटिल, बाबा से कर भेंट ।
      सदा पिनक में आलसी, लेता सर्प लपेट ।

      लेता सर्प लपेट, समझता खुद को औघड़ ।
      पी रविकर का रक्त, करे बेमतलब हुल्लड़ ।

      कातिल सनकी मूढ़, पहुँचता बिना बुलाये ।
      दुराचार नित करे, धर्म का भ्रम फैलाए ।

      हटाएं
    2. आपके उत्कृष्ट दोहों के साथ यह भी-

      कुटिल आलसी और बाबा पर |

      हटाएं
  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया दोहे ,शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  10. जीवन इक त्यौहार है, जानो इसका सार।
    प्यार और मनुहार से, बाँटो कुछ उपहार ~जीवन का सार इसी में है...!

    सभी दोहे बढ़िया हैं शास्त्री सर !
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  11. उत्कृष्ट दोहों की उत्कृष्ट प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  12. बिल्ले रखवाली करें, गूँगे राग सुनाय।
    अब तो अपने देश में, अन्धे राह बताय।८।
    अन्धे की जगह पूडल भी आ सकता है .

    उत्तर देंहटाएं

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