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शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

"नमन शैतान करते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है,
हसीं पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है।
बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,
दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।

बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,
कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।
किया है रात को रोशन, दिये हैं चाँद और तारे,
अमावस को मिटाने को, दियों में रोशनी भर दी।।

दिया है दुःख का बादल, तो उसने ही दवा दी है,
कुहासे को मिटाने को, उसी ने तो हवा दी है।
जो रहते जंगलों में, भीगते बारिश के पानी में,
उन्ही के वास्ते झाड़ी मे कुटिया सी छवा दी है।।

सुबह और शाम को मच्छर सदा गुणगान करते हैं,
जगत के उस नियन्ता को, सदा प्रणाम करते हैं।
मगर इन्सान है खुदगर्ज कितना आज के युग में ,
विपत्ति जब सताती है, नमन शैतान करते है।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. मगर इन्सान है खुदगर्ज कितना आज के युग में,
    विपत्ति जब सताती है , नमन शैतान करते है,,,,,,,,

    बहुत सुंदर उत्कृष्ट रचना,,,

    recent post : प्यार न भूले,,,

    उत्तर देंहटाएं
  2. तान तान शैतान ने, तानपुरा के तार |
    बाजा बेसुर बजा के, रुला दिया संसार |

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह...वाह..

    निरुत्तर हूँ सर... नमन मेरा ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति जो रहते जंगलों में, भीगते बारिश के पानी में,
    उन्ही के वास्ते झाड़ी मे कुटिया सी छवा दी है।।
    vaah

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह ... बहुत ही बढिया प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मगर इन्सान है खुदगर्ज कितना आज के युग में ,
    विपत्ति जब सताती है, नमन शैतान करते है।।

    आज का मानव-
    अतीत से सीखता नहीं,
    भविष्य का भय नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (24-11-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  8. कबीरा कुछ न बन जाना तजके मान गुमान ,

    माती के पुतले काहे पे इतना गुमान .बढ़िया प्रस्तुति .ईश्वर की निर्मिती पर .

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहद आकर्षित करने वाली प्रस्तुती के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. विपत्ती में शैतान ही नमन करते हैं इन्सान को सुख में भी सुमिरन करते रहना है । सुंदर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं

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