"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

"सुदामा भटक रहा है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तन्त्र ये खटक रहा है।
सुदामा भटक रहा है।।

कंस हो गये कृष्ण आज,
मक्कारी से चल रहा काज,
भक्षक बन बैठे यहाँ बाज,
महिलाओं की लुट रही लाज,
तन्त्र ये खटक रहा है।
सुदामा भटक रहा है।।

जहाँ कमाई हो हराम की
लूट वहाँ है राम नाम की,
महफिल सजती सिर्फ जाम की
बोली लगती जहाँ चाम की,
तन्त्र ये खटक रहा है।
सुदामा भटक रहा है।।

जहरीली बह रही गन्ध है,
जनता की आवाज मन्द है,
कारा में सच्चाई बन्द है,
गीतों में अब नहीं छन्द है,
तन्त्र ये खटक रहा है।
सुदामा भटक रहा है।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. महफिल सजती सिर्फ जाम की
    बोली लगती जहाँ चाम की,,,,

    भावमय सुंदर प्रस्तुति,,,,,

    resent post : तड़प,,,

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  3. जहाँ कमाई हो हराम की
    लूट वहाँ है राम नाम की,
    महफिल सजती सिर्फ जाम की
    बोली लगती जहाँ चाम की,
    तन्त्र ये खटक रहा है।
    सुदामा भटक रहा है।।

    लाजबाब !

    उत्तर देंहटाएं
  4. सटीक...
    हम सब के मन में खटकता है
    आज क्यों सुदामा भटकता है ....???
    शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी प्रस्तुति !
    ~सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. जहाँ कमाई हो हराम की
    लूट वहाँ है राम नाम की,
    महफिल सजती सिर्फ जाम की
    बोली लगती जहाँ चाम की,

    ....बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  7. गरीब सुदामा का कृष्ण एक न एक दिन अवश्य आयेगा..

    उत्तर देंहटाएं
  8. तंतर बदलने के दि‍न फि‍र आ रहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  9. कंस हो गये कृष्ण आज,
    मक्कारी से चल रहा काज,
    भक्षक बन बैठे यहाँ बाज,
    महिलाओं की लुट रही लाज,
    तन्त्र ये खटक रहा है।
    सुदामा भटक रहा है।।

    सच कहा आज की परिस्थिति का सटीक आकलन

    उत्तर देंहटाएं
  10. तन्त्र ये खटक रहा है।
    -सबको खटक रहा है!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails