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बुधवार, 21 नवंबर 2012

"बिरयानी का स्वाद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चारसाल तक चख लिया, बिरयानी का स्वाद।
करने को अब चल दिया, दोजख़ को आबाद।१।

पलभर में ही हो गया, जीवन का अवसान।
दाग़दार दामन किया, कहलाया हैवान।२।

जाते-जाते दे गया, दुनिया को सन्देश।
उग्रवाद करने कभी, जाना मत परदेश।३।

17 टिप्‍पणियां:

  1. Ati sundar पलभर में ही हो गया, जीवन का अवसान।
    दाग़दार दामन किया, कहलाया हैवान।२।

    जाते-जाते दे गया, दुनिया को सन्देश।
    उग्रवाद करने कभी, जाना मत परदेश।३।

    उत्तर देंहटाएं
  2. चार साल जीनो को जो रखा इसको छोड़ ,
    छूना देश पर लगा गया पूरे पचास करोड़ !

    उत्तर देंहटाएं
  3. उग्रवाद करने कभी,जाना मत परदेश। अच्छी पंक्ति,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  5. शुरू कहानी जब हुई, करो फटाफट पूर ।
    झूलें फांसी शेष जो, क्यूँ है दिल्ली दूर ??
    क्यूँ है दिल्ली दूर, कड़े सन्देश जरूरी ।
    एक एक निपटाय, प्रक्रिया कर ले पूरी ।
    कुचल सकल आतंक, बचें नहिं पाकिस्तानी ।
    सुदृढ़ इच्छा-शक्ति, हुई अब शुरू कहानी ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. करो तुम दोजख आबाद
    पियो खून और मवाद
    दुनिया रखेगी हरदम
    तेरे कारनामे काले याद

    उत्तर देंहटाएं
  8. उग्रवाद तो.... कहीं भी उचित नहीं है...! चाहे अपना घर हो या दूसरे का......
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  9. कसाब के फाँसी पर उत्तम प्रस्तुति । बुरे काम का बुरा नतीजा ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छी रचना..
    अब सच्ची श्रद्धांजलि मिली है शहीदों को..

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढ़िया प्रस्तुति | पर और भी अच्छा तो तब भी होता जब सबको पहले से बता कर फांसी दिया जाता | पता नहीं सरकार को किससे डर था या अपने सुरक्षा तंत्र पर भरोसा नहीं था |

    उत्तर देंहटाएं
  12. संक्षिप्त सुन्दर सार्थक .बधाई .

    उत्तर देंहटाएं

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