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मंगलवार, 6 नवंबर 2012

"पन्द्रह दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

एकल कवितापाठ का, अपना ही आनन्द।
रोज़ करो ये गोष्ठी, करके कमरा बन्द।१।
--
काव्यमयी कर टिप्पणी, निभा रहे जो धर्म।
अब आया है समझ में, उन लोगों का मर्म।२।
--
टिप्पणियों के ढेर से, बन जाती है पोस्ट।
अपनी रचना बाँचकर, खोल लीजिए ओष्ठ।३।
--
आम आदमी पिस रहा, मजे लूटता खास।
मँगाई की मार से, मेला हुआ उदास।४।
--
प्रियतम भूला आपको, आप कर रहे याद।
पत्थर से करना नहीं, कोई भी फरियाद।५।
--
कम शब्दों के मेल से,  दोहा बनता खास।
सरस्वती जी का रहे, सबके उर में वास।६।
--
ठगती सबको लालसा, मानव हों या देव।
लालच बुरी बलाय है, इससे बचो सदैव।७।
--
एक-एक कर सभी की, खोल रहे जो पोल।
सही राह बतला रहे, सन्तों के ये बोल।८।
--
देश खोखला कर दिया, जीना किया हराम।
फर्रूखाबादी हुए, फोकट में बदनाम।९।
--
फिर से पैदा हो गये, बाबर-औरंगजेब।
इनमें उनकी ही तरह, भरे हुए हैं ऐब।१०।
--
वाणी में ही निहित हैं, सभी तरह के शब्द।
कुछ देते हैं सुख यहाँ, कुछ कर देते दग्ध।११।
--
सम्बन्धों की आड़ में, वासनाओं का खेल।
झूठी कर तारीफ को, करते तन का मेल।१२।
--
आम आदमी पिस रहा, खास हो रहे मस्त।
खोटे सिक्कों ने करी, यहाँ व्यवस्था ध्वस्त।१३।
--
सामाजिक परिवेश में, आयी है अब मोच।
कुछ लोगों की हो गई, कितनी गन्दी सोच।१४।
--
पलकों पर ठहरी हुई. इन्तज़ार की ओस।
बिना पिये ही हृदय को, कर देती मदहोश।१५।
-0-0-0-

14 टिप्‍पणियां:

  1. एकल कविता पाठ कर के लगता है कि स्वयं से बतिया रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (07-11-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बहुत मजेदार दोहे..आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह...
    बहुत बढ़िया दोहे...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  5. एकल कवितापाठ का, अपना ही आनन्द।
    रोज़ करो ये गोष्ठी, करके कमरा बन्द।१।
    सभी दोहे शानदार पर इसका आनंद तो सबसे बढ़कर है .सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  6. देश खोखला कर दिया, जीना किया हराम।
    फर्रूखाबादी हुए, फोकट में बदनाम।९।
    --
    फिर से पैदा हो गये, बाबर-औरंगजेब।
    इनमें उनकी ही तरह, भरे हुए हैं ऐब।१०।
    --
    वाणी में ही निहित हैं, सभी तरह के शब्द।
    कुछ देते हैं सुख यहाँ, कुछ कर देते दग्ध।११।

    बहुत सुंदर दोहे ।

    उत्तर देंहटाएं

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