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गुरुवार, 29 नवंबर 2012

"गंगास्नान मेला, झनकइया-खटीमा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गंगास्नान के मेले का शेष भाग!
नदी शारदा में किया, उत्सव का स्नान।
फिर खिचड़ी खाकर किया, मेले को प्रस्थान।।
झनकइया वन में लगा, मेला बहुत विशाल।
वियाबान के बीच में, बिकता सस्ता माल।।
यहाँ सिँघाड़े बिक रहे, गुब्बारों की धूम।
मस्ती में-उल्लास में, लोग रहे हैं घूम।।
आदिवासियों ने यहाँ, डेरा दिया जमाय।
जंगल में मंगल किया, पिकनिक रहे मनाय।।
बहुत करीने से सजा, चाऊमिन का नीड़।
जिसको खाने के लिए, लगी बहुत है भीड़।।
फल के ठेले हैं यहाँ, फूलों की दूकान।
मनचाहा रँग छाँट लो, रंगों की है खान।।
गरमा-गरम जलेबियाँ, और पकौड़ी खाय।
मेला घूमों शान से, हज़म सभी हो जाय।।

जलेबियों को देखकर, आया रविकर याद।
घर में बनी जलेबियाँ, ही देती हैं स्वाद।।
सब्जी बिकती धान से, दाम नहीं है पास।
बिन पैसे के हो रहा, मेला आज उदास।।
ऊँचे झूले लगे हैं, भाँति-भाँति के खेल।
सर्कस के इस खेल मे, भारी धक्का-पेल।।
घर के दाने बिक रहे, बच्चों का है साथ।
महँगाई की मार से, बिगड़ रहे हालात।।
आओ अब घर को चलें, घिर आई है शाम।
जालजगत पर अब हमें, करना है कुछ काम।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत रोचक चित्रमय प्रस्तुति...

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  2. मजा आ गया तस्वीरें देखकर

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  3. बहुत सुन्दर चित्रमय प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  4. दुबई बैठे परदेसियों को भी आपने मेले के दर्शन करवा दिए। साथ ही भारतीय व्यंजनों की तस्वीरें दिखा कर फिर वतन की याद दिला दी।

    उत्तर देंहटाएं
  5. यहाँ सिँघाड़े बिक रहे, गुब्बारों की धूम।
    मस्ती में-उल्लास में, लोग रहे हैं घूम।।

    chitramaii bahut badhiya prastuti .....

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. मेला घुमाने के लिए धन्यवाद... इन्टरनेट के समय में पूरा मेला इसी माध्यम से घूम लिया... ई मेला.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. तस्‍वीरें देखकर मजा आ गया...जीवंत हो गया हो जैसे सब

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी इस पोस्‍ट ने मन खुश कर दिया ... मेला घूमना तस्‍वीरों के मध्‍य
    बहुत ही अच्‍छा लगा
    सादर

    उत्तर देंहटाएं

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