उपासना में वासना, मुख में है हरिनाम।
सत्संगों की आड़ में, करते गन्दे काम।।
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जनता के धन-माल पर, ऐश करे परिवार।
बाबाओं के पास में, दौलत का अम्बार।।
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कुटिया में एकान्त में, सिखलाते हैं योग।
राम नाम के नाम पर, फैलाते हैं भोग।।
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ललनाओँ को जाल में, सन्त फँसाता रोज।
ऐसा कामी-अधम तो, धरती पर है बोझ।।
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हत्या और बलात् के, किये आपने काम।
गुरूकुलों के नाम को, कर डाला बदनाम।।
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अपने ओछे कर्म से, किया कलंकित नाम।
शर्म-लाज आयी नहीं, आशाओँ के राम।।
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एकदम सटीक सामायिक दोहे,,,
जवाब देंहटाएंRECENT POST : फूल बिछा न सको
इन जैसे ढोंगियों के चलते ही सच्चे साधू संतो की भी बदनामी हो रही है,ऐसे ढोंगी वासना के पुजारी धरती पर बोझ ही हैं। बहुत ही सार्थक दोहे,आभार आपका।
जवाब देंहटाएंभीड़ तंत्र का कमाल है
जवाब देंहटाएंसारे पागल मालामाल हैं !
सटीक प्रस्तुति-
जवाब देंहटाएंआभार गुरु जी-
आदरणीय सर,
जवाब देंहटाएंक्या कहूँ, इस लाज़वाब सत्य रुपी शब्द के लिए।
ये तो अपने आप में अनमोल हैं, और जिस सुन्दर कारीगरी से
आपने बुने हैं, वो तो बेहतरीन/उत्कृष्ट हैं।
नमन आपको और आपकी सुन्दर लेखनी को।
सदर
हमे इस सबसे बचना होगा।
जवाब देंहटाएंसामयिक दोहे गुरु जी ,
जवाब देंहटाएंसब बाबाओं की छवि धूमिल कर रहे हैं
-बहुत सुन्दर सामयिक दोहे
जवाब देंहटाएंlatest post नसीहत
बहुत सामायिक दोहे, जो कुत्सित कर्म बाबाओं के द्वारा हो रहे हैं उनको दोहों में प्रस्तुत कर एक सटीक सन्देश दिया है, इन उत्कृष्ट दोहों के लिए आदरणीय शास्त्री जी हृदय से बधाई आपको|
जवाब देंहटाएंबाबाओं की कुत्सित कर्म की पोल खोलता आपका पोस्ट इसके लिए आपको हृदय से बधाई.......
जवाब देंहटाएंआपकी ये पोस्ट मैंने अपने ब्लॉग पर प्रदर्शित किया है कृपया आप मेरे ब्लॉग पर पधारें।
आज ढोंगी और मक्कार ही देश के भगवान बने बैठे हैं..
जवाब देंहटाएंहर विषय पर दोहे ! आपकी विशेषता
जवाब देंहटाएंसटीक सामायिक दोहे....
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