मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे, जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए। मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
जिनके कारण जगे, वो मगर सो गये, हमने उनको पुकारा, वो गाफिल हुए। मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
मन फड़कता रहा, आस पलती रही, हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए। मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
अब तो आने से कोई नही फायदा, वो तो बेदिल रहे, हम तो बा-दिल हुए। मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।। |
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दिल धड़कता रहा, साँस चलती रही, मन फड़कता रहा, आस पलती रही, हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए।
जवाब देंहटाएंtoooooo good ....! badhai Sweekaare Janaab...!
बहुत बढिया रचना!!! बधाई।
जवाब देंहटाएंmayank ji
जवाब देंहटाएंis gazal men aanand aa gaya.
prastuti juda hai aapki
- vijay
जीते जी मेरे घर वो ना दाखिल हुए।
जवाब देंहटाएंमेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
बाट तकते रहे, ख्वाब बुनते रहे,
उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे,
जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए।
मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
क्या बात हैं.... उत्तम अभिव्यक्ति। साधू!!
बहुत खूबसूरती से कहे गये भाव
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
अत्यन्त सुंदर भाव के साथ आपने इस ग़ज़ल को पेश किया है जो बहुत ही अच्छा लगा! बहुत खूब!
जवाब देंहटाएंशुक्र मना लीजिये...मैयत में तो शामिल हुआ..!!
जवाब देंहटाएंबहुत कमाल की रचना. शुभकामनाएं.
जवाब देंहटाएंरामराम.
मयंक जी।
जवाब देंहटाएंइस बढ़िया गजल के लिए,
शुभकामनाएँ।
मयंक जी।
जवाब देंहटाएंगजल बहुत खूबसूरत है।
दिल को छू गई।
बधाई।
bahut hi dilkash gazal likhi hai........ik aah si nikal gayi...........shandar........badhayi
जवाब देंहटाएंक्या बात है...
जवाब देंहटाएंहर बंद लाजवाब
बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंदिल धड़कता रहा, साँस चलती रही, मन फड़कता रहा, आस पलती रही, हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए।
लाजवाब बधाई
जीते जी मेरे घर वो ना दाखिल हुए।
जवाब देंहटाएंमरे तो मय्यत में आके शामिल हुए।
बाट तकते रहे, ख्वाब बुनते रहे
उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे,
जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए।
बहुत ही सुन्दर . बधाई!
Bahut pyaaree rachnaa.
जवाब देंहटाएं{ Treasurer-S, T }
WOW!! amazing ... u indeed have the art to write and have got amazing thoughts.
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