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शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

"विज्ञान का युग.." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

एक पुराना गीत!

युग सदा विज्ञान का, चलता रहेगा।
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

आँधियाँ बेशक चलें, भूकम्प भी आते रहें,
यज्ञ तो परित्राण का, फलता रहेगा।
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

कर्म का नही चक्र रुकना चाहिए,
नेह तो इन्सान का, पलता रहेगा।
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

धर्म की राहें, कुटिल सी हो गयीं,
ह्रास तो भगवान का, खलता रहेगा।
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

सत्य का झण्डा कभी झुकता नही,
सूर्य तो अज्ञान का, ढलता रहेगा।
यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. यह ज्ञान का प्रकाश यूं ही कायम रहेगा..

    उत्तर देंहटाएं
  2. आँधियाँ बेशक चलें, भूकम्प भी आते रहें,
    यज्ञ तो परित्राण का, फलता रहेगा।
    यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

    बहुत सुन्दर बात कही है ..अज्ञान का सूरज चाहे कितना ही चमके अस्त हो ही जायेगा ..

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह दिया है ज्ञान का जलता रहेगा

    बहुत सुंदर गीत...आशा और प्रेरणा से परिपूरित।

    उत्तर देंहटाएं
  4. यह दिया है ज्ञान का जलता रहेगा

    बहुत सुंदर गीत...आशा और प्रेरणा से परिपूरित।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सत्य का झण्डा कभी झुकता नही,
    सूर्य तो अज्ञान का, ढलता रहेगा।
    यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।।

    बिलकुल सत्य कहा आपने ... सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकारें ... शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  6. ज्ञान का दीया हमेशा जलता रहे ……………सुन्दर संदेश के साथ सुन्दर भाव संयोजन्।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आँधियाँ बेशक चलें, भूकम्प भी आते रहें,
    यज्ञ तो परित्राण का, फलता रहेगा।
    बहुत सुन्दर रचना ...ज्ञान का प्रकाश समस्त अंधकारों को नष्ट कर ही देता है

    उत्तर देंहटाएं
  8. धर्म की राहें, कुटिल सी हो गयीं

    wah wah wah..!

    उत्तर देंहटाएं

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