"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

"ग़ज़ल:आशा शैली" (प्रस्तोता:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

----------
गुजर जाएगी यह शब हौसला रख
सुबह के वास्ते दर को खुला रख

सज़ा दे-दे या खुद को माफ़ कर दे
अंधेरे में न तू यूँ फैसला रख

वो मुंसिफ़ कुछ नहीं सुनता किसी की
न उसके पास अपना मामला रख

कई मज़लूम होंगे इस जहाँ में
सभी के वासते लब पर दुआ रख

न रो-रो कटेगी उम्र सारी
तू मुस्कानों की दामन में ज़िया रख

बहुत हैं चाहने वाले तुम्हारे
तू 'शैली' दामने-दिल को तो वा रख

आशा शैली 'हिमाचली'

-----------

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही लाजवाब गजल, शुभकामनाएं. प्रणाम.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. गज़ब की गज़ल है……………हर शेर उम्दा……………बहुत ही सुन्दर ……………दिल मे उतर गयी।

    उत्तर देंहटाएं
  3. वो मुंसिफ़ कुछ नहीं सुनता किसी की
    न उसके पास अपना मामला रख


    कई मज़लूम होंगे इस जहाँ में
    सभी के वासते लब पर दुआ रख
    लाजवाब !

    उत्तर देंहटाएं
  4. …बहुत ही सुन्दर गज़ल है, शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  5. न रो-रो कटेगी उम्र सारी
    तू मुस्कानों की दामन में ज़िया रख


    बहुत खूबसूरत गज़ल पढवाई है ...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस पोस्ट का लिंक कल शुक्रवार को (२६--११-- २०१० ) चर्चा मंच पर भी है ...

    http://charchamanch.blogspot.com/

    --

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत हैं चाहने वाले तुम्हारे'
    तू शैली दामने-दिल को तो वा रख।

    बेहतरीन शे'र ,ख़ूबसूरत नाज़ुक ग़ज़ल।

    शिली जी का आभार व उनको मुबारकबाद्।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. कई मज़लूम होंगे इस जहाँ में
    सभी के वासते लब पर दुआ रख

    बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल है ... कमाल के शेर हैं ... सलाम है मेरा ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. छोटी बहर की उम्दा गजल।शैली और शास्त्रीजी को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  11. लाजवाब गज़ल!
    सुन्दर प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  12. मन को छूने वाली खूबसूरत गजल. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं
  13. कई मज़लूम होंगे इस जहाँ में
    सभी के वासते लब पर दुआ रख

    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ...

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails