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बुधवार, 24 नवंबर 2010

"तान वीणा की सुनाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

तान वीणा की सुनाओ कर रहे हम कामना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

अब ध्ररा पर ज्ञान की गंगा बहाओ,
तम मिटाकर सत्य के पथ को दिखाओ,
लक्ष्य में बाधक बना अज्ञान का जंगल घना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

बेसुरे से राग में, अनुराग भर दो,
फँस गये हैं हम भँवर में, पार कर दो,
शारदे माँ कुमति हरकर सबको मेधावी बना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

वन्दना है आपसे, रसना में रस की धार दो,
हम निपट अज्ञानियों को मातु निज आधार दो,
माँ हमें वरदान दो, होवें सफल सब साधना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. यही है हम सबकी सम्मिलित आराधना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत प्रार्थना .

    उत्तर देंहटाएं
  3. यही है हम सबकी सम्मिलित आराधना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वन्दना है आपसे, रसना में रस की धार दो,
    हम निपट अज्ञानियों को मातु निज आधार दो,
    माँ हमें वरदान दो, होवें सफल सब साधना।
    माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

    बेहद भावप्रवण दिल से की गयी आराधना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन को छूती बेहद सुंदर प्रार्थना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं
  6. माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

    हम सबकी भी है ये ही प्रार्थना ... बहुत खूबसूरत रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सुंदर रचना. प्रणाम.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत खूबसूरत .......... सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  9. माँ शारदे की सुन्दर प्रार्थना के लिये बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. वन्दना है आपसे, रसना में रस की धार दो,
    हम निपट अज्ञानियों को मातु निज आधार दो,
    माँ हमें वरदान दो, होवें सफल सब साधना।
    माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

    बहुत सुंदर खूबसूरत प्रार्थना !

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्रार्थना अत्यंत सुन्दर है!
    जय माँ शारदे!

    उत्तर देंहटाएं

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