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गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

"निज मन के उद्गार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सुन्दर दोहे कह रहे, टिप्पणियों में मित्र।
अनुशंसा की रीत भी, होती बहुत विचित्र।१।

जो देखा वो लिख दिया, नहीं नव्य-सन्देश।
अज्ञानी कैसे करे, ज्ञानी को उपदेश।२।

जिनकी झोली में भरा, रत्नों का अम्बार।
किन्तु आज वो देखते, औरों का भण्डार।३।

अंकित पृष्ठों में करो, निज मन के उद्गार।
संचित कर रख लीजिए, ये अनुपम उपहार।४।

वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।५।

28 टिप्‍पणियां:

  1. बड़े सटीक दोहे हैं, बिहारीलाल की तरह।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अंकित पृष्ठों में करो, निज मन के उद्गार।
    संचित कर रख लीजिए, ये अनुपम उपहार।
    क्या बात है. सुन्दर दोहे.

    उत्तर देंहटाएं
  3. अंकित पृष्ठों में करो, निज मन के उद्गार...

    great expression !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  4. sateek baat kahte hue sundar dohon se saji sundar prasuti ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।५।

    umda dohe sir ,

    उत्तर देंहटाएं
  6. वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान...

    माँ हम पर कृपा करें !
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  7. निज मन के उद्धार .......कव्य भी सुन्दर ,अनुशीलन भी ...
    बहुत प्रभाव्शील दोहे ,,,,/

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर दोहे कह रहे, टिप्पणियों में मित्र।
    अनुशंसा की रीत भी, होती बहुत विचित्र।१।

    जो देखा वो लिख दिया, नहीं नव्य-सन्देश।
    अज्ञानी कैसे करे, ज्ञानी को उपदेश।२।


    अंकित पृष्ठों में करो, निज मन के उद्गार।
    संचित कर रख लीजिए, ये अनुपम उपहार।४।

    saty likhaa hai aapne ,tippnee karne bhar ke liye tippnee karnaa
    likhne waale ke liye anyaay hai
    saarthak tippniyon kaa akaal hai.
    ek doosre kee peeth khujaane kee hod chal rahee hai

    उत्तर देंहटाएं
  9. टिप्पणियाँ
    तुम मेरे लिए
    कुछ कहो
    मैं तुम्हारे लिए
    कुछ कहूं
    अर्थ हो ना हो
    मैं भी खुश
    तुम भी खुश

    उत्तर देंहटाएं
  10. वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।५।

    sunder dohe ..

    उत्तर देंहटाएं
  11. सही रंग भरा आपने टिपण्णी व्यंग्य कविता में !

    उत्तर देंहटाएं
  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुंदर दोहे बहुत खूब
    बधाई....

    उत्तर देंहटाएं
  14. शास्त्री जी,नमस्कार ...!
    अज्ञानी कैसे करे, ज्ञानी को उपदेश.....!
    रोज़ कुछ, नया सीखता हूँ !आप से |

    उत्तर देंहटाएं
  15. .



    आदरणीय शास्त्री जी
    प्रणाम !
    बहुत सुंदर दोहे लिखे हैं आपने …
    आप छंद - महारथी ब्लॉगर हैं …

    सारा रहस्य बता दिया आपने श्रेष्ठ सृजन का …
    वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।


    वाह ! वाऽऽह !

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  16. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
    १०:१४ अपराह्न (17 घंटे पहले)

    Rajendra
    आपकी टिप्पणी मेरे मेल बाक्स में तो आई है मगर ब्लॉग पर नहीं दिखाई दे रही है। क्या कारण रहा होगा?
    --
    Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने आपकी पोस्ट " "निज मन के उद्गार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "म... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    आदरणीय शास्त्री जी
    प्रणाम !
    बहुत सुंदर दोहे लिखे हैं आपने …
    आप छंद - महारथी ब्लॉगर हैं …

    सारा रहस्य बता दिया आपने श्रेष्ठ सृजन का …
    वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।

    वाह ! वाऽऽह !

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  17. अभी गूगल की बहुत प्रकार की समस्याएं ब्लॉग्स पर आ रही हैं … पता नहीं क्या बात है …

    आपके यहां मैंने लिखा था -


    आदरणीय शास्त्री जी
    प्रणाम !
    बहुत सुंदर दोहे लिखे हैं आपने …
    आप छंद - महारथी ब्लॉगर हैं …

    सारा रहस्य बता दिया आपने श्रेष्ठ सृजन का …
    वन्दन माता का करो, पा जाओगे ज्ञान।
    खुश होकर देंगी वही, प्रज्ञा का शुभदान।


    वाह ! वाऽऽह !

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत सुन्दर दोहे! बढ़िया लगा!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  19. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!चर्चा मंच में शामिल होकर चर्चा को समृध्द बनाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  20. सुन्दर सन्देश देते दोहों में अच्छी चुटकी है सर....
    सादर आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  21. अंकित पृष्ठों में करो, निज मन के उद्गार।
    संचित कर रख लीजिए, ये अनुपम उपहार...

    बहुत अच्छी सीख दी है आपने...सभी दोहे लाजवाब हैं, आनन्द आ गया! इन्हें साझा करने के लिए कृपया हमारा धन्यवाद स्वीकारें!
    सादर,
    सारिका मुकेश

    उत्तर देंहटाएं

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