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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

‘‘सब जगह राम है’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


रम रहा सब जगह राम है।
ये धरा राम का धाम है।।

सच्चा-सच्चा लगे,
सबसे अच्छा लगे,
कितना प्यारा प्रभू नाम है।
ये धरा राम का धाम है।।

नाम जप लो अभी,
राम भज लो सभी,
लगता कोई नहीं दाम है।
ये धरा राम का धाम है।।

वो खुदा-ईश्वर,
सबको देता है वर,
वो ही रहमान है श्याम है।
ये धरा राम का धाम है।।

वो अजर है अमर,
सब जगह उसका घर,
सबके करता सफल काम है।
ये धरा राम का धाम है।।

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भक्तिमय प्रस्तुति...जय श्री राम

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया प्रस्तुति |
    निराला अंदाज |
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. सब तरफ राम ही राम..राममयी सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर रचना ………राममय हो गये।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कण कण राम का
    कण कण में राम

    सुन्दर रचना सर...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  6. "मोको कहाँ खोजे रे बन्दे में तो तेरे पास रे" शायद यही भाव आपकी कविता में निहित है सारगर्भित पोस्ट | आशा है कि आगे भी ज्ञानवर्धक बातें पढने मिलेंगी|

    उत्तर देंहटाएं
  7. रूप जी आपका यह रंग भी अच्छा लगा। जय श्रीराम!

    बिनु विश्‍वास भगति नहिं, तेहि बिनु द्रवहिं न राम।
    राम कृपा बिनु सपनेहुं, जीवन लह विश्राम ।।

    उत्तर देंहटाएं
  8. खूबसूरत राम मय प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  9. ये धरा राम का धाम है।।

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेहतरीन भक्तिमय प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  11. भक्ती मय सुंदर प्रस्तुति ,.बधाई ..
    मेरे नए पोस्ट-जूठन-में आपका इंतजार है

    उत्तर देंहटाएं
  12. आप की पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (२०) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /कृपया वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हिंदी भाषा की सेवा इसी लगन और मेहनत से करते रहें यही कामना है / आभार /link


    http://hbfint.blogspot.com/2011/12/20-khwaja-gareeb-nawaz.html

    उत्तर देंहटाएं
  13. bahut achchi bhaktimay prastuti.sab jagah ram hai sab ke dil me ram hai bhinn bhinn bhaashaon me naam alag hai par ek hi ram hai.

    उत्तर देंहटाएं

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