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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

"मजबूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कुहासे की चादर 
मौसम ने ओढ़ ली,
ठिठुरन से मित्रता 
भास्कर ने जोड़ ली। 
निर्धनता खोज रही
आग के अलाव,
ईंधन के बढ़ गये 
ऐसे में भाव।
हो रहा खुलेआम 
जंगलों का दोहन,
खेतों में पनप रहे
कंकरीट मोहन। 
ठण्ड से काँप रहा 
कोमल बदन,
कूड़े से पन्नियाँ 
बीन रहा बचपन।
खोज रहा नौनिहाल
कचरे में रोटियाँ,
सांसद नोच रहा
गोश्त और बोटियाँ।
उदर में जल रही
भूख की ज्वाल,
निर्धन के पेट में
अन्न का अकाल।
कुहरा तो एक दिन 
छँट ही जायेगा. 
उसके बाद सूरज भी 
गर्मी दिखायेगा
सर्दी में कम्पन,
गर्मी में स्वेदकण 
झेलना जरूरी है.
नून, तेल-आटे को

लाना मजबूरी है।।

25 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा शास्त्रीजी...

    सर्दी में कम्पन,
    गर्मी में स्वेदकण
    झेलना जरूरी है.
    नून, तेल-लकड़ी को
    पाना मजबूरी है।

    इतनी गूढ कविता आप से अनुभवी ही कह सकते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  4. ghajab ki prastuti.tareef ke liye shabd kam hain.bahut,bahut achcha.

    उत्तर देंहटाएं
  5. ठंड में उत्साह भी संकुचित होने लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. jaha ek or apne thand mausam ka varnan kiya hai wahi siyasati logo ki bhi khinchayi ki di hai..
    bahut hi sundar or sarthak lekhani
    ati sundar rachana hai..

    उत्तर देंहटाएं
  7. अच्छी रचना,
    बहुत सुंदर


    सर्दी में कम्पन,
    गर्मी में स्वेदकण
    झेलना जरूरी है.
    नून, तेल-लकड़ी को
    पाना मजबूरी है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बाबा नागार्जुन लिखते थे ऐसी कविता.... जनवादी स्वर खो रहा है हिंदी कविता में... बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  9. अच्छी रचना बढ़िया लगी,..........

    उत्तर देंहटाएं
  10. aapki is sundar prastuti par mujhe "teen ber khaati thi ve teen ber khaati hain..." yaad aa gaya...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर शब्दों में इस समाज में पल रही विषमताओं के वर्ग को ढाला है, इसको कोई भी नकार नहीं सकता है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. कल आप की किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है ...!कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार भी दें ...आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  13. सच्चाई को ब्यान करती बहुत ही खूबसूरता एवं सटीक प्रस्तुति बहुत अच्छा लिखा है आपने शुभकामनायें ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  15. परिवेश प्रधान बेहतरीन प्रस्तुति अमीरी गरीबी के बीच का फासला समेटी .

    उत्तर देंहटाएं

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