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रविवार, 4 दिसंबर 2011

"चंचल मन की हाथ में, रखना खींच लगाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज भी देखिए कुछ दोहे
जीवन के दो चक्र है, सुख-दुख जिनके नाम।
दोनों ही हालात में, धीरज से लो काम।।

चंचल मन की हाथ में, रखना खींच लगाम।
इसके हाथों तुम कभी, बनना नहीं गुलाम।।

जिसने मन पर कर लिया, स्वामी बन अधिकार।
मानवता का मिल गया, उसको ही उपहार।।

सरल सुभाव अगर नहीं, धर्म-कर्म सब व्यर्थ।
छल और कपट मनुष्य का, करता सदा अनर्थ।।

जीवन प्रहसन के सभी, इस दुनिया में पात्र।
सबका जीवन है यहाँ, चार दिनों का मात्र।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर, वाह


    जिसने मन पर कर लिया, स्वामी बन अधिकार।
    मानवता का मिल गया, उसको ही उपहार।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिसने मन पर कर लिया, स्वामी बन अधिकार।
    मानवता का मिल गया, उसको ही उपहार।। बहुत प्रेरक और सुंदर अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  3. सबका जीवन है यहाँ, चार दिनों का मात्र।।
    ध्रुव सत्य!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति ||

    बधाई ||

    http://terahsatrah.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. सरल सुभाव अगर नहीं, धर्म-कर्म सब व्यर्थ।
    छल और कपट मनुष्य का, करता सदा अनर्थ।।
    बहुत खूब
    सुंदर दोहे

    उत्तर देंहटाएं
  6. सत्य कथन है ....
    सुंदर रचना के लिए आभार आपका !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज भी एक नई सीख नमन करती हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  8. सरल सुभाव अगर नहीं, धर्म-कर्म सब व्यर्थ।
    छल और कपट मनुष्य का, करता सदा अनर्थ।।
    उत्तम विचार।

    उत्तर देंहटाएं
  9. जिसने मन पर कर लिया, स्वामी बन अधिकार।
    मानवता का मिल गया, उसको ही उपहार।।...
    bahut badiya hai aapka har dohaa
    sach kaha
    par kabhi kabhi jeevan mei aisa hona bahut mushkil sa ho jaat hai ....aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  10. hii.. Nice Post

    For latest stills videos visit ..

    www.chicha.in

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    उत्तर देंहटाएं
  11. जिसने मन पर कर लिया, स्वामी बन अधिकार।
    मानवता का मिल गया, उसको ही उपहार।।
    sab dohe ek se badhkar ek hain atiuttam prastuti.

    उत्तर देंहटाएं

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