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मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

"रोज हाट से लौकी लाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

लौकी होती गुणकारी है।
बीमारी इससे हारी है।।

रोज हाट से लौकी लाओ।
छीलो-काटो और पकाओ।।

सब्ज़ी या रायता बनाओ।
रोटी-पूड़ी के संग खाओ।।

चाहे इसका जूस निकालो।
थोड़ा काला नमक मिलालो।।

रोज सवेरे यह रस पी लो।
आनन्दित हो जीवन जी लो।।

यह रसायन हितकारी है।
इसीलिए लौकी प्यारी है।।


21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर लौकी का बखान,
    देता हुआ मरीजो को ज्ञान
    दिल की बीमारी से बचाता है जान
    सभी लोग मान ले लौकी का अहसान,..
    ज्ञानवर्धक बेहतरीन पोस्ट ..............
    मेरे नए पोस्ट में आपका इंतजार है,..

    उत्तर देंहटाएं
  2. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    terahsatrah.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया कविता!
    --
    मयंक जी की लेखनी से
    कोई विषय अछूता नहीं रहेगा!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बिल्कुल सच। क्या कहूं बच्चे लौकी से ऐसा भागते हैं कि फिर बनाने का मन ही नहीं होता।
    वैसे लौकी गुणकारी है, इसमें कोई दो राय हो ही नहीं सकता।
    कविता बच्चों पढवाता हूं, शायद लौकी लाने की कुछ छूट मिल जाए।

    बहुत सुंदर पंक्तियां

    उत्तर देंहटाएं
  5. लौकी की खासियत का सुंदर ढंग से वर्णन।

    उत्तर देंहटाएं
  6. हितकारी लौकी तो जब भी हाट जाते हैं,
    हम ज़रूर से लाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. लौकी का हलुवा भी बहुत स्‍वादिष्‍ट होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. अरे वाह लौकी कितनी अच्छी है...सुन्दर कविता ..

    उत्तर देंहटाएं
  9. आजकल कुछ 'लौकियाँ ' अपना मौलिक गुण छोड़ "कड़वे" गुण को प्राप्त कर रही हैं - ठीक 'नेताओं' की तरह - ठीक से परखना पढ़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  10. आजकल कुछ 'लौकियाँ ' अपना मौलिक गुण छोड़ "कड़वे" गुण को प्राप्त कर रही हैं - ठीक 'नेताओं' की तरह - ठीक से परखना पढ़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  11. आजकल कुछ ' लौकियाँ ' अपना मौलिक गुण छोड़ कर 'कड़वे' गुण को प्राप्त हो रही हैं - ठीक कुछ 'नेताओं' की तरह. परखना पड़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आजकल कुछ ' लौकियाँ ' अपना मौलिक गुण छोड़ कर 'कड़वे' गुण को प्राप्त हो रही हैं - ठीक कुछ 'नेताओं' की तरह. परखना पड़ेगा.

    उत्तर देंहटाएं

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