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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

"चाँद और तारों की बातें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

चाँद और तारों की बातें,
मन के उद्गारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

उत्सव-त्यौहारों की बातें,
मोहक उपहारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

यौवन शृंगारों की बाते,
उन्नत बाज़ारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

अपने अधिकारों की बातें,
स्वप्निल संसारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

सुख के उजियारों की बातें,
भोले बंजारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

चहके परिवारों की बातें,
महके गलियारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

बढ़ते आधारों की बातें,
भरते भण्डारों की बातें,
कितनी अच्छी लगती हैं!

37 टिप्‍पणियां:

  1. चहके परिवारों की बातें,
    महके गलियारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!

    सुन्दर गीत ।
    सर्दियों में ये बातें और भी अच्छी लगती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रोज निकलता चाँद और रोज होती बातें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर सर...
    कविता में कही मीठी और सुलभ बातें..बहुत अच्छी लगती हैं...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  4. अपने अधिकारों की बातें,
    स्वप्निल संसारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!

    सच: बहुत अच्छी लगती है ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर रचना....

    मेरी नई पोस्ट काव्यान्जलि ...: महत्व .....में click करे

    उत्तर देंहटाएं
  6. खूबसूरत रचना संसार आपका ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. कुछ बातें हमेशा अच्छी लगती है ...बहुत ही सुंदर गीत।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर शब्द..मेरे ब्लॉग कलमदान.ब्लागस्पाट.कॉम पर भी पधारें..

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर शब्दावली, सुन्दर अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  10. SACHMUCH ACHHI LAGTI HAI KUCH BATEN,AAPKI RACHNA BHI BADI ACHHI LAGI. BADHAIE

    उत्तर देंहटाएं
  11. haan in sab ke sath sath

    apki pyari ye rachnaye
    aur
    hamari rachnao ki charcha
    charcha manch pe bhi
    bahuuuuuuuut pyari lagti hain.

    ha.ha.ha.

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुख के उजियारों की बातें,
    भोले बंजारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!

    वाकई अच्छी लगती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  13. सच में बहुत अच्छी लगती हैं...

    अपने अधिकारों की बातें,
    स्वप्निल संसारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!

    सुन्दर रचना, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  14. aapki sabhi post jivant hati haen .jivan ke prati sakaaratmak soch ko bdhava deti hui aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  15. चहके परिवारों की बातें,
    महके गलियारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!
    वाकई !

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-737:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  17. चहके परिवारों की बातें,
    महके गलियारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं!

    सुन्दर गीत सर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  18. ye sab acche lagate hai or accha lagata hai aapke blog par aana....

    उत्तर देंहटाएं
  19. अपने अधिकारों की बातें,
    स्वप्निल संसारों की बातें,
    कितनी अच्छी लगती हैं...


    baal geet ho ya kee ghazal ho
    mohak shabdon se jab banti tasweer
    dil kahta hai jhumjhum ke
    kitni acchi lagti hai,,,,,,,,,,,,sadar badhayee ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  20. नन्हीं पंक्तियों की रचना बहुत ही प्यारी लगी.

    रूप ओ रुखसारों की बातें
    गुल ओ गुलजारों की बातें
    कितनी अच्छी लगती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  21. सुंदर भाव ...बातें तो अच्छी लगतीं ही हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  22. ख़ूबसूरत शब्दों से सुसज्जित उम्दा रचना के लिए बधाई!
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  23. आपकी रचनाएं बहुत अच्छी लगती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  24. आपकी रचनाएं बहुत अच्छी लगती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  25. बहार हो कि खिज़ां मुस्कुराए जाते हैं,
    हयात हम तेरा एहसाँ उठाए जाते हैं |
    सुलगती रेत हो बारिश हो या हवाएं हों,
    ये बच्चे फिर भ़ी घरौंदे बनाए जाते हैं |
    ये एहतमाम मुहब्बत है या कोई साज़िश,
    जो फूल राहों में मेरी बिछाए जाते हैं |
    समझ सको तो हैं काफी ये आँख में आंसू,
    के दिल के ज़ख्म किसे कब दिखाए जाते हैं |
    कोई भ़ी लम्हा क़यामत से कम नहीं फिर भ़ी,
    तुम्हारे सामने हम मुस्कुराए जाते हैं |
    http://ummaten.blogspot.com/2011/12/blog-post_28.html

    उत्तर देंहटाएं

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