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बुधवार, 21 दिसंबर 2011

"अभिनन्दन-वन्दन करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

गुलदस्ते में सजे हैं, सुन्दर-सुन्दर फूल।
सुमनों सा जीवन जियें, बैर-भाव को भूल।१।
शस्य-श्यामला धरा है, जीवन का आधार।
आओ पौधों से करें, धरती का शृंगार।२।
जनमानस पर कर रहे, कोटि-कोटि अहसान।
सबका भरते पेट हैं, ये श्रमवीर किसान।३।
मातृभूमि के वास्ते, देते जो बलिदान।
रक्षा में संलग्न हैं, अपने वीर जवान।४।
अभिनन्दन-वन्दन करें, आओ मन से आज।
आज किसान-जवान से, जीवित सकल समाज।५।

16 टिप्‍पणियां:

  1. jay javaan jay kisaan dono ke hi dam se humara jeevan humara desh hai.bahut sundar bhaavon se saji rachna.

    उत्तर देंहटाएं
  2. जनमानस पर कर रहे, कोटि-कोटि अहसान।
    सबका भरते पेट हैं, ये श्रमवीर किसान

    jay javaan jay kisaan .

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर दोहे रच दिए, ख़ूब सजाया ब्लॉग।
    रंग सलोने देखकर, याद आ गया फाग।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. नित नये दोहे रच रहे,बढ़ रही ब्लॉग की शान,
    नितनित नई शिक्षा मिले,बढे रहा हमारा ज्ञान,

    बहुत खुबशुरत प्रस्तुति,......

    मेरी नई पोस्ट के लिए काव्यान्जलि मे click करे

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन दोहे.....
    हर दोहे में सुंदर संदेश.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. sundar chitro ke sath bahut hi sundar dohe hai...
    pratyek pankti hame apne dharati ma ke or karib le jati hai...
    man me bharat or bharatvasiyo ke prati samman badhati behad khubsurat rachana hai...

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी को प्राप्त है देवी का वरदान,
    नित्य प्रति वे बांटते हमको अनुपम ज्ञान.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर तस्वीरों से सुसज्जित शानदार दोहे ! लाजवाब प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  9. शस्य-श्यामला धरा है, जीवन का आधार।
    आओ पौधों से करें, धरती का शृंगार।२।

    उत्कृष्ट दोहे हैं सर...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं

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