"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 10 जुलाई 2013

"मैं तुम्हारे लिए गीत बन जाऊँगा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुनगुनाओ जरा कोई धुन प्यार से,
मैं तुम्हारे लिए गीत बन जाऊँगा।
मेरी सूरत बसाओ हिये में प्रिये!
मैं तुम्हारे लिए मीत बन जाऊँगा।

आग बुझने न देना कभी प्यार की,
बात करना सदा नव्य उपहार की,
हीरे-पन्ने तो पत्थर हैं-निष्प्राण हैं,
मैं तुम्हारे लिए प्रीत बन जाऊँगा।।

मन के विश्वास को हारना मत कभी
हार संसार से मानना मत कभी,
तुम बुरे वक्त में याद करना मुझे,
मैं तुम्हारे लिए जीत बन जाऊँगा।

धन-घटा देख भयभीत होना न तुम,
चश्म को आँसुओं से भिगोना न तुम,
ढाल की क्या जरूरत तुम्हें है प्रिये!
मैं तुम्हारे लिए भीत बन जाऊँगा।

20 टिप्‍पणियां:

  1. मन के मीत को वादों का उपहार .....

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह शाश्त्री जी, अच्छे अच्छे वादे किये हैं, जरा निभाने में पीछे मत रह जाना.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर आशा..सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11/07/2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन के विश्वास को हारना मत कभी
    हार संसार से मानना मत कभी,
    तुम बुरे वक्त में याद करना मुझे,
    मैं तुम्हारे लिए जीत बन जाऊँगा।

    Prerak Shashtri Ji

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह प्रेमरस में सराबोर सुन्दर गीत बधाई आपको

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने


    कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री असली चेहरा : पढिए रोजनामचा
    http://dailyreportsonline.blogspot.in/2013/07/like.html#comment-form

    उत्तर देंहटाएं

  8. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 12-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...

    उत्तर देंहटाएं
  9. गीत ... खुबसूरत गीत ....मज़ा आ गया गुनगुनाकर

    उत्तर देंहटाएं
  10. यही होता है सच्चा मीत ………।सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  11. सकारात्मक भाव लिए ,आशाएँ जगाता गीत अच्छा लगा.

    उत्तर देंहटाएं
  12. भाव भरी प्रेरक पंक्तियाँ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. जीवन ऐसे ही बीते तो कितना अच्छा ...
    लाजवाब भाव प्रधान रचना .. नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. तुम बुरे वक्त में याद करना मुझे,
    मैं तुम्हारे लिए जीत बन जाऊँगा।

    वाह !!! बहुत उम्दा प्रस्तुति,,,

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails