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सोमवार, 15 जुलाई 2013

‘‘रावण को जलाओ तो कोई बात बने’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मीत का साथ निभाओ तो कोई बात बने।
गीत में साज बजाओ तो कोई बात बने।।

एक दिन मौज मनाने से क्या भला होगा?
रोज दीवाली मनाओ तो कोई बात बने।

इन बनावट के उसूलों में धरा ही क्या है?
प्रीत हर दिल में जगाओ तो कोई बात बने।

क्यों खुदा कैद किया दैर-ओ-हरम में नादां,
रब को सीने में सजाओ तो कोई बात बने।

सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।
रूप की धूप रहेगी न सलामत नादां,
 इश्क का ध्यान लगाओ तो कोई बात बने।

17 टिप्‍पणियां:

  1. क्यों खुदा कैद किया दैर-ओ-हरम में नादां,
    रब को सीने में सजाओ तो कोई बात बने।

    ...बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 17/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. करना तो वही था, जब उसे नहीं जला पाते हैं तो पुतला जला लेते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सटीक गजल, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।

    बहुत खूब,कमाल की सार्थक प्रस्तुति,,,

    RECENT POST : अपनी पहचान

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर है .माया रावण के राज में किस किस को ...जलावोगे .पूरी फसल सरकंडे की तरह जलानी पड़ेगी .माया सर्व व्यापी है .

    उत्तर देंहटाएं
  7. एक दिन मौज मनाने से क्या भला होगा?
    रोज दीवाली मनाओ तो कोई बात बने।

    बहुत सुंदर ..मधुर रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या बात है -
    आभार गुरु जी -

    उत्तर देंहटाएं
  9. रोज दीवाली मने और दिल का रावण जले...सुंदर बात !

    उत्तर देंहटाएं
  10. सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने। सुन्दर रचना शास्त्रीजी सहमत हूँ आपसे .साथ ही यह भी पूछना चाहूँगा
    जो जीते भी कर भी कुछ न कर सके उन पुतलों को भी लगाने से फायदा क्या है,
    परेशानी का सबब बनने को जो नित चौराहों पर आ खड़े हो जाते हैं,

    उत्तर देंहटाएं

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