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मंगलवार, 9 जुलाई 2013

"जय-जय जगन्नाथ भगवान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मित्रों!
कल से भगवान जगन्नाथ की 
रथयात्रा प्रारम्भ हो रही है।
इस अवसर पर प्रस्तुत है,
मेरा यह गीत।
 
सारा जग गाता गुणगान।
जय-जय जगन्नाथ भगवान।।

जिस पथ से रथ निकलेगा,
धरती पावन हो जायेगी।
अवतारी प्रभु की नगरी,
भी मनभावन हो जायेगी।
रथ की महिमा बहुत महान।
जय-जय जगन्नाथ भगवान।।

इन्द्रद्युम्न जबसे कान्हा को,
अपनी नगरी में लाये।
तब से पुरी नगर में, खुशियों के
घन नभ पर हैं छाये।
ईश्वर देते हैं वरदान।
जय-जय जगन्नाथ भगवान।।

जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा,
की प्रतिमा मनभावन।
उनको इच्छित फल देतीं,
जिनका मन होता है पावन।
मन में करना इनका ध्यान।
जय-जय जगन्नाथ भगवान।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 10/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. पंक्तियां रोचक लगी व सार‍गर्भित भी है

    उत्तर देंहटाएं
  3. पंक्तियां रोचक लगी व सार‍गर्भित भी है

    उत्तर देंहटाएं
  4. अभी पुरी की यात्रा कर के ही लौटे है और यकीन मानिए अगर आप वहां का हाल देख लें तो हालत- ए- मंदिर पर तत् क्षण कविता लिखने को बाध्य हो जाएंगे ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. खूबशूरत अहसाह,बहुत सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. मन भक्तिमय हो गया - साधुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (10-07-2013) के .. !! निकलना होगा विजेता बनकर ......रिश्तो के मकडजाल से ....!१३०२ ,बुधवारीय चर्चा मंच अंक-१३०२ पर भी होगी!
    सादर...!
    शशि पुरवार

    उत्तर देंहटाएं
  8. भक्ति-भाव मन को पवित्र कर देता है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. जगन्नाथ स्वामी, नयनपथगामी भवतु मे।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर महिमा प्रस्तुति ..
    जय जगन्नाथ भगवान!

    उत्तर देंहटाएं

  11. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

    उत्तर देंहटाएं

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