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मंगलवार, 2 जुलाई 2013

"सभ्यता के हाथ सभ्यता शिकार हो गई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

ज़िन्दगी हमारे लिए
आज भार हो गई! 
मनुजता की चूनरी तो
तार-तार हो गई!! 
हादसे सबल हुए हैं 
गाँव-गली-राह में 
खून से सनी हुई 
छुरी छिपी हैं बाँह में 
मौत ज़िन्दगी की 
रेल में सवार हो गई! 
मनुजता की चूनरी तो
तार-तार हो गई!! 

भागने की होड़ में
उखाड़ है-पछाड़ है
आज जोड़-तोड़ में
अजीब छेड़-छाड़ है
जीतने की चाह में
करारी हार हो गई!
मनुजता की चूनरी तो
तार-तार हो गई!! 

चीत्कार काँव-काँव 
छल रही हैं धूप-छाँव 
आदमी के ठाँव-ठाँव 
चल रहे हैं पेंच-दाँव 
सभ्यता के हाथ 
सभ्यता शिकार हो गई! 
मनुजता की चूनरी तो
तार-तार हो गई!! 

20 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के .१२९५ ....... जीवन के भिन्न भिन्न रूप ..... तुझ पर ही वारेंगे हम .!! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
      सादर...!
      शशि पुरवार

      हटाएं
  2. बढ़िया बात-

    भाव विभोर करती रचना

    आभार गुरु जी-

    उत्तर देंहटाएं
  3. सभ्यता के हाथ
    सभ्यता शिकार हो गई...

    आज के दौर की भयावह सच्चाई से रूबरू कराती इस उत्कृष्ट कविता को हमसे साझा करने के लिए आपको सादर नमन!

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुरु जी को प्रणाम
    आपकी रचना कल बुधवार [03-07-2013] को
    ब्लॉग प्रसारण पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
    सादर
    सरिता भाटिया

    उत्तर देंहटाएं
  5. सभ्यता के हाथ
    सभ्यता शिकार हो गई!
    मनुजता की चूनरी तो
    तार-तार हो गई!!

    सारा सच बयाँ कर दिया

    उत्तर देंहटाएं
  6. सभ्यता के हाथ 
    सभ्यता शिकार हो गई! 
    मनुजता की चूनरी तो
    तार-तार हो गई!! सुंदर भाव।

    उत्तर देंहटाएं

  7. सुंदर प्रस्तुति...
    मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 05-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



    जय हिंद जय भारत...


    मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...

    उत्तर देंहटाएं
  8. amazing lines guru jee

    meri nayi post par aapka swaagat hai...

    http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2013/07/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (03-07-2013) के .. जीवन के भिन्न भिन्न रूप ..... तुझ पर ही वारेंगे हम .!! चर्चा मंच अंक-1295 पर भी होगी!
    सादर...!
    शशि पुरवार

    उत्तर देंहटाएं
  10. मनुजता की चूनरी तो
    तार-तार हो गई!! ...बहुत सुन्दर भाव आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. आज के यथार्थ को सच्चाई से बयान करती सशक्त प्रस्तुति ! बहुत सुंदर !

    उत्तर देंहटाएं
  12. सभ्यता के हाथ
    सभ्यता शिकार हो गई!
    सशक्त प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  13. चुनरी तो तार तार हो गयी ..
    प्रणाम आपको !

    उत्तर देंहटाएं

  14. जीतने की चाह में
    करारी हार हो गई!

    ...बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  15. मानवता को शर्मसार करती घटनाओं से उपजी सटीक बयानी करती कविता !

    उत्तर देंहटाएं

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