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बुधवार, 4 नवंबर 2009

"उजड़ा है प्यारा उपवन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



कलियाँ मसल रहे हैं डाकू, वीराना सा हुआ चमन।
सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।


सोने की चिड़िया के कुन्दन पंख सलोने नोच लिए,
रत्न-जड़ित सिंहासन, धोखा देकर स्वयं दबोच लिए,
घर लगता सूना-सूना सा, मरुथल सा लगता आँगन।
सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।


गोली - बारूदों को, भोली - भाली बस्ती झेल रही,
अवश-विवश से मौत अनर्गल पल-पल होली खेल रही,
पूजन-वन्दन है पिंजड़े में, घूम रहा आजाद दमन।
सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।


केसर की क्यारी को कैसे, मिल पायेगा छुटकारा,
छल-बल के ताने-बाने का, कौन करेगा निबटारा,
गिद्ध-दृष्टि से कैसे बच पायेगा मेरा सरल सुमन।
सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर!बहुत सही।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  2. ''रत्न-जड़ित सिंहासन, धोखा देकर स्वयं दबोच लिए''
    जो भी इस सिंघासन को
    पाता है वह शोषक हो जाता है |

    सुन्दर कविता ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना . आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर,सुन्दर भावपूर्ण !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. गोली - बारूदों को, भोली - भाली बस्ती झेल रही,
    अवश-विवश से मौत अनर्गल पल-पल होली खेल रही,
    पूजन-वन्दन है पिंजड़े में, घूम रहा आजाद दमन।
    सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।


    bhaavpoorn shabdon ke saath khoobsoorat rachna.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेहद सुरुचिपुर्ण रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह.....
    क्या खूब पंक्तियाँ रच दी आपने.......

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीय मयंक जी,

    नमस्कार !

    ज़्यादा तो मैं नहीं जानता लेकिन इतना अवश्य कह सकता हूँ कि आप लामिसाल हैं, कमाल हैं, कमाल हैं, कमाल हैं । हर बार आपको बाँच कर भीतर तक एक सरसराहट होती है जैसे कई दिनों के प्यासे व्यक्ति को शीतल जल मिल जाए तो पीते समय कैसे अपने भीतर वह शीतल स्पर्श अनुभवता है ..वही हाल मेरा हो जाता है आप कि कविता बाँच कर .........

    सोने की चिड़िया के कुन्दन पंख सलोने नोच लिए,
    रत्न-जड़ित सिंहासन, धोखा देकर स्वयं दबोच लिए,
    घर लगता सूना-सूना सा, मरुथल सा लगता आँगन।
    सौरभ सुमन कहाँ से आयें, उजड़ा है प्यारा उपवन।।

    वाह !
    वाह !

    _____अभिनन्दन आपका हज़ार हज़ार बार दिल से

    उत्तर देंहटाएं
  9. सोने की चिड़िया के कुन्दन पंख सलोने नोच लिए,
    रत्न-जड़ित सिंहासन, धोखा देकर स्वयं दबोच लिए केसर की क्यारी को कैसे, मिल पायेगा छुटकारा,
    छल-बल के ताने-बाने का, कौन करेगा निबटारा,,

    सुन्दर भावपूर्ण रचना . शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  10. खूब लिखा है।
    ऊँची-ऊँची इमारतों में उपवन सिमटा गुलदस्तों
    शुक्र करते हैं कि यह अब तक सजता है सस्तों में
    आप जैसों की कृपा से उपवन मन में सज जाता है।
    वरना अब तो उपवन भी सजता है प्लास्टिकों के फूलों से।।

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर कविता शास्त्री जी ...धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर लिखा आप ने .
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुंदर और सठिक रचना लिखा है आपने! उम्दा रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  14. ek bahut hi utkrisht rachna......kitna gahan likhte hain aap.........aapki lekhni ko naman.

    उत्तर देंहटाएं

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