"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 30 नवंबर 2009

"वीराना जैसा अपना चमन हो नही सकता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



वीराना जैसा अपना चमन हो नही सकता।
इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।


वीरों  ने इसे सींचा है शोणित की धार से,
सन्तों ने सँवारा है बहुत लाड़-प्यार से,
मुर्झाया हुआ इसका सुमन हो नही सकता।
इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।


इसमें ही पल रहा है, अमन-चैन हमारा,
इसमें ही चल रहा है, धर्म-कर्म हमारा,
अब और खण्ड-खण्ड वतन हो नही सकता।
इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।


गुंचों की हिफाजत को हैं कुछ खार जरूरी,
फौजों के साथ होते हैं हथियार जरूरी,
साकार शत्रुओं का सपन हो नही सकता।
इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर पंक्तियाँ .... बहुत अच्छी लगी कविता....
    --
    www.lekhnee.blogspot.com


    Regards...


    Mahfooz..

    उत्तर देंहटाएं
  2. गुंचों की हिफाजत को हैं कुछ खार जरूरी,
    फौजों के साथ होते हैं हथियार जरूरी,
    बिलकुल सत्य है
    सुन्दर भाव

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर कविता लिखी शास्त्री जी, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. आस्था और आशावादिता से भरपूर स्वर इस कविता में मुखरित हुए हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. गुंचों की हिफाजत को हैं कुछ खार जरूरी,
    फौजों के साथ होते हैं हथियार जरूरी,
    साकार शत्रुओं का सपन हो नही सकता।
    इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।

    sunder bhav..sachchi baat..bahut sunder kavita

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर भाव के साथ बेहद ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  7. waah waah shastri ji .........bahut hi sundar aur aashavadi kavita.......lajawaab.

    उत्तर देंहटाएं
  8. वीराना जैसा अपना चमन हो नही सकता।
    इतना उदास फूलों का मन हो नही सकता।।
    बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  9. कल 30/नवंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्या खूब लिखा है आपने ...........अच्छा लगा पढ़ कर!

    उत्तर देंहटाएं
  11. देशप्रेम की भावना से ओत -प्रोत कविता .....सुंदर ....बधाई ॥!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails