"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 15 नवंबर 2009

"वो तो कुत्ते की मौत मरता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



जो परिन्दे के पर कतरता है।
वो इबादत का ढोंग करता है।।


जो कभी बन नही सका अपना,
दम वही दोस्ती का भरता है।


दीन-ईमान को जो छोड़ रहा,
कब्र में पाँव खुद ही धरता है।


पार उसका लगा सफीना है,
जो नही ज़लज़लों से डरता है।


इन्तहा जिसने जुल्म की की है,
वो तो कुत्ते की मौत मरता है।


23 टिप्‍पणियां:

  1. और मरना भी चाहिए शास्त्रीजी !

    ज़ुल्म करने वाले को सज़ा मिलनी ही चाहिए..........

    बहुत ही शानदार पोस्ट !

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो परिन्दे के पर कतरता है।
    वो इबादत का ढोंग करता है।।
    सीधी सच्ची और इमानदार बात

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो परिन्दे के पर कतरता है।
    वो इबादत का ढोंग करता है।।


    pahli pankti ne hi man moh liya....

    poori kavita apne aap mein sampoorn hai....

    bahut achchi lagi..........

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत लाजवाब. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. "इन्तहा जिसने जुल्म की की है"

    ग़ज़ल में यमक अलंकार का
    सुंदर प्रयोग दिखाई दिया!

    उत्तर देंहटाएं
  6. सौ आने सच्ची बात कही आपने...आप की कविता कुछ ना कुछ सीख देती है..बधाई शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  7. काफी संतुष्टि प्रदान कर गई

    उत्तर देंहटाएं
  8. १००००००००००००००००००००००००००% सत्य वचन महाराज !

    उत्तर देंहटाएं
  9. जो परिन्दे के पर कतरता है।
    वो इबादत का ढोंग करता है।।
    बहुत सुंदर शास्त्री जी, जबाब नही

    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. Bahut Hi kamaal ki rachna likhi aapne Shastri ji... man prasann ho gaya..
    Jai Hind...

    उत्तर देंहटाएं
  11. जो परिन्दे के पर कतरता है।
    वो इबादत का ढोंग करता है....
    बहुत सही ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. सही बात कही आपने शास्‍त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  13. इन्तहा जिसने जुल्म की की है,

    वो तो कुत्ते की मौत मरता है।

    अगर ये लोग समझे तो...
    बहुत ही सुन्दर, एक एक लब्ज आपका वजनदार है शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुंदर और लाजवाब रचना लिखा है आपने ! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  15. जो परिन्दे के पर कतरता है।
    वो इबादत का ढोंग करता है ...

    कमाल की बात लिखी है शास्त्री जी ... सच है जो मूक पंचियों पर ज़ुल्म करता है वो साची पूजा नही कर सकता ....... बहूत अच्छी रचना है ..........

    उत्तर देंहटाएं
  16. waah kya khoob likha hai...........tarif ke liye shabd bhi kam pad jayein jahan.........lajawaab

    उत्तर देंहटाएं
  17. aise logon ka yahi hashra hona chahiye , sahi anzaam par pahunchati gazal

    उत्तर देंहटाएं
  18. करीने से कह दी आपने बड़ी बात, लगभग हर बार की तरह...

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails