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सोमवार, 9 नवंबर 2009

"पुरानों को नमन और नयों को प्रणाम!!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सूर, कबीर, तुलसी, के गीत,
सभी में निहित है प्रीत।
आज
लिखे जा रहे हैं अगीत,
अतुकान्त
सुगीत, कुगीत
और नवगीत।
जी हाँ!
हम आ गये हैं
नयी सभ्यता में,
जीवन कट रहा है
व्यस्तता में।
सूर, कबीर, तुलसी की
नही थी कोई पूँछ,
मगर
आज अधिकांश ने
लगा ली है
छोटी या बड़ी
पूँछ या मूँछ।
क्योंकि इसी से है
उनकी पूछ 
या पहचान,
लेकिन
पुरातन साहित्यकारों को तो
बना दिया था
उनके साहित्य ने ही महान।
परिपूर्ण थी 
उनकी लेखनी
मर्यादाओं से,
मगर
आज तो लोगों को
सरोकार है
विविधताओं से।
लो हो गया काम,
पुरानों को नमन
और नयों को प्रणाम!!

18 टिप्‍पणियां:

  1. हम लौट आये हैं
    अपनी पुरानी सभ्यता में,
    जीवन कट रहा है
    व्यस्तता में।
    वाह शास्त्री जी मैं तो आपकी रचना को पढ़कर निशब्द हो गई ! हर एक पंक्तियाँ आपने इतने सुंदर तरीके से लिखा है जो सच्चाई का प्रतीक है!
    आज अधिकांश ने
    लगा ली है
    छोटी या बड़ी
    पूँछ या मूँछ।
    बिल्कुल सही कहा है आपने!
    लो हो गया काम,
    पुरानों को नमन
    और नयों को प्रणाम!!
    बेहतरीन और शानदार रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छा लगा बाँच कर............
    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  3. भाव अच्छे लगे
    शास्त्री को सलाम

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. मगर
    आज तो लोगों को
    सरोकार है
    विविधताओं से।
    लो हो गया काम,
    पुरानों को नमन
    और नयों को प्रणाम!!

    मेरा भी नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूब, बढ़िया लगी आपकी ये रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब............ क्या कहने !!आपको भी हार्दिक नमन।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज अधिकांश ने
    लगा ली है
    छोटी या बड़ी
    पूँछ या मूँछ
    सुंदर


    भाव बढ़िया है
    सादर नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  8. पुरानों को नमन
    और नयों को प्रणाम!!
    पुराने हो या नये भाई मेरा तो हर किसी को प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  9. विचार के क्षण ही नहीं मनोरंजन और फुलझड़ियों का ज़यका भी मिला।

    उत्तर देंहटाएं
  10. पुरानों को नमन
    और नयों को प्रणाम!!
    बिलकुल सही लिखा आप ने धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. बढ़िया!!


    नया हूँ अतः प्रणाम!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. पुरानों के आशिर्वाद से नए भी अच्छा लिख रहे हैं शास्त्री जी....
    सभी सूर तुलसी कबीर नहीं हो सकते

    उत्तर देंहटाएं

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