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रविवार, 29 नवंबर 2009

"हमें संस्कार प्यारे हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

उजाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में छाँटो,
हमें अँधियार प्यारे हैं।
निवाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में चाटो.
हमें किरदार प्यारे हैं।

नही जाती हलक के पार, भारी भीख की रोटी,
नही होगी यहाँ पर फिट, तुम्हारी सीख की गोटी,
बबाला ले के आये हो तो, अपने मुल्क में काटो,
हमें सरदार प्यारे हैं।

फिजाँ कैसी भी हो हर हाल में हम मस्त रहते हैं,
यहाँ के नागरिक हँसते हुए हर कष्ट सहते हैं.
गज़ाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में बाँटो,
हमें दस्तार प्यारे हैं।

तुम अपने पास ही रक्खो, ये नंगी सभ्यता गन्दी,
हमारे पास है अपनी, हुनर वाली  अक्लमन्दी,
हमें संस्कार प्यारे हैं

17 टिप्‍पणियां:

  1. हमें संस्कार प्यारे हैं। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

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  2. वाह .. हर हाल में हमें अपने संस्‍कारों को बचाकर ही रखना चाहिए !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. निवाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में चाटो.
    हमें किरदार प्यारे हैं।

    बहुत सुन्दर, लाजवाब,हमारे दिल की बात आपने कह दी

    उत्तर देंहटाएं
  4. "फिजां कैसी भी हो हर हाल में हम मस्त रहते हैं।"
    बहुत खूब ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमें संस्कार प्यारे हैं। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ बहत सुंदर कविता.....



    बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. काश आप की तरह हर कोई सोचता, आज तो सब हमारे अपने संस्कारो को ही भूल रहे है,
    बहुत सुंदर कविता कही आप ने, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  7. कविता इतनी मार्मिक है कि सीधे दिल तक उतर आती है ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. satya vachan shastri ji...
    humein dastaar pyaare hain...
    apne sanskaar pyaare hain...

    bahut he achhi rachna hai aapki...

    mubarak...

    उत्तर देंहटाएं
  9. हमें अँधियार प्यारे हैं।निवाला ले के आये हो तो अपने मुल्क में चाटो.हमें किरदार प्यारे हैं।

    सुन्दर अभिव्यक्ति है बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. संसकारो के लिये ही तो हमे जाना जाता है. इसे बचाकर रखना होगा.

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावपूर्ण उम्दा रचना...दिल को छूती है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. फिजाँ कैसी भी हो हर हाल में हम मस्त रहते हैं,
    यहाँ के नागरिक हँसते हुए हर कष्ट सहते हैं.
    बहुत सुंदर भाव के साथ आपने उम्दा रचना लिखा है!

    उत्तर देंहटाएं
  13. लाजबाब शास्त्री जी , ये हमारे संस्कार ही है जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते है और आगे बढाते है !

    उत्तर देंहटाएं
  14. तुम अपने पास ही रक्खो, ये नंगी सभ्यता गन्दी,
    हमारे पास है अपनी, हुनर वाली अक्लमन्दी,
    हमें संस्कार प्यारे हैं....

    सच कहा ..... अपने संस्कारों को बचाना बहुत ज़रूरी है ....... कमाल की रचना है जी .... नमश्कार ..........

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  15. Shastriji
    aapke manch par aakar laga kisi paathshaala mein dakhil hui hoon. bahut hi umda rachnaaon se milna hua. har abhivyakti apne aap mein ek sandesh!!

    उत्तर देंहटाएं

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