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बुधवार, 2 दिसंबर 2009

"मेरा भारत देश महान!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



न और सुमन हमेशा गायें अभिनव मंगल गान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


उगें नये पौधे बगिया में, मिले खाद और पानी,
शिक्षा के भण्डार भरे हों, नर-नारी हों ज्ञानी,
तुलसी, सूर, कबीर सुनाएँ राम कृष्ण की तान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


ललनाएँ सीता जैसी  हों, भरत-लखन से भाई हों, 
वीर शिवा जैसे प्रसून हों, कलियाँ लक्ष्मीबाई हों,
आजादी के परवानों का, गाँव-नगर में हो सम्मान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


चिंगारी आतंकवाद की कहीं भड़कने ना पायें,
गद्दारी अलगाववाद की नहीं धड़कने आ पायें,
इन्सानों की बस्ती में, अब नही पलने पाये शैतान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


सुख का सूरज सजे गगन में, बादल अमृत बरसायें,
विश्व गुरू बनकर हम जग को, पावन पथ दिखलायें,
तब सचमुच ही कहलाएगा, मेरा भारत देश महान।
अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।


21 टिप्‍पणियां:

  1. ये इच्छा पूरी हो ,कामना करता हूं । इसमें हम सब का भला है

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बेहतर रचना शास्त्री जी ! हम तो सिर्फ आशा ही लगाए रख सकते है की कभी आपका यह दिव्यस्व्प्न साकार हो !

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  3. सुन्दर विचार और अभिव्यक्ति.

    मेरा भारत महान

    उत्तर देंहटाएं
  4. यह भावना सभी देश वासियो की होना चाहिए . बहुत बढ़िया रचना ......

    उत्तर देंहटाएं
  5. उगें नये पौधे बगिया में, मिले खाद और पानी,

    शिक्षा के भण्डार भरे हों, नर-नारी हों ज्ञानी,

    तुलसी, सूर, कबीर सुनाएँ राम कृष्ण की तान।

    अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।

    AAMEEN......KAASH ESA HI HO.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढिया लिखा आपने .. अवश्‍य पूरे होंगे हमारे सपने !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. चिंगारी आतंकवाद की कहीं भड़कने ना पाये,
    गद्दारी अलगाववाद की कही धड़कने ना पाये,
    इन्सानों की बस्ती में, अब नही पलने पाये शैतान।
    अपनी कुटिया बन जाएगी सुन्दर विमल-वितान।।
    बहुत सुंदर भाव के साथ आपने हर शब्द लिखा है ! हमारे देश के प्रति सभी के मन में ऐसा ही विचार हो तो कितना अच्छा रहेगा!

    उत्तर देंहटाएं
  8. "कुछ हजारों" को छोड़, जिन्हें गरीबी, बदहाली, बेकारी, भुखमरी, अभावों से कुछ नहीं लेना-देना, शायद हर भारतवासी का यही सपना है।

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  9. बहुत अच्छा ओर सुंदर विचार. धन्यवाद

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  10. ऐसा ही हो ..
    लेकिन यह अपने आप नहीं होगा।...

    अच्छी कविता.
    आपकी छन्द साधने की कला अप्रतिम है।!

    उत्तर देंहटाएं
  11. भारत देश महान..बढ़िया छन्द ..हर पंक्तियाँ लाज़वाब..बधाई

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  12. बहुत ही सुन्दर पंक्तियां महोदय ।

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  13. सबका मन यही करता है लेकिन दुनिया में दिन है तो रात भी होती ही है। फिर भी दुनिया जितनी नेक बने उतना ही अच्‍छा। हम सब इसी तरह सोचते रहेंगे तो बदलाव भी आएगा।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां, गहन भावों का समावेश आपका यह स्‍वप्‍न साकार हो ।

    आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुख का सूरज सजे गगन में, बादल अमृत बरसायें,
    विश्व गुरू बनकर हम जग को, पावन पथ दिखलायें,.

    आपके मुँह में घी शक्कर ...... अगर ऐसा हो जाए तो अपना भारत फिर से महान हो जाए ...... सुंदर प्रस्तुति ......

    उत्तर देंहटाएं

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