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मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

"बे-सबब उपहार की बातें करें!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आओ कुछ संसार की बातें करें।
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


कामनाओं में लगी अब होड़ है,
खाज मे उपजा हुआ अब  कोढ़ है,
गुम हुए त्योहार की बातें करें।
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


मित्रता में अब नही वो बात है,
दोस्त करता दोस्त से ही घात है,
छल भरी उपकार की बातें करें।
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


अब नही वो परवाज गानों मे रही,
साज के बल पर दुकानें चल रही,
अब बनावट प्यार की बातें करें।
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


सब पुराने आशियाने ढह गये,
होड़ में नूतन ठिकाने रह गये,
मतलबी दिलदार की बातें करें।
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


बेवफाई का सिला गुल दे रहे,
खार सब आरोप सिर पर ले रहे,
बे-सबब उपहार की बातें करें। 
प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


18 टिप्‍पणियां:

  1. मित्रता में अब नही वो बात है,
    दोस्त करता दोस्त से ही घात है,...
    होता तो यही आया है ...मगर .....
    मतलबी दिलदार की बाते करे ...बेसबब उपहार की बाते करें ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सब पुराने आशियाने ढह गये,
    होड़ में नूतन ठिकाने रह गये,
    होड ही तो है जो हमारे हर विश्वास हर संस्कृति को पीछे छोड रहा है
    बहुत सुन्दर और सामयिक

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेवफाई का सिला गुल दे रहे,
    खार सब आरोप सिर पर ले रहे,
    बे-सबब उपहार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।

    बहुत खूब। अच्‍छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सब पुराने आशियाने ढह गये,
    होड़ में नूतन ठिकाने रह गये,
    मतलबी दिलदार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


    बहुत सुन्दर.......

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रीत और मनुहार की बातें करें।।

    एकदम समय के अनुकूल, सार्थक और सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. अब बनावट प्यार की बातें करें।
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। आज के संदर्भ में।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेवफाई का सिला गुल दे रहे,
    खार सब आरोप सिर पर ले रहे,
    बे-सबब उपहार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।

    सुन्दर छन्द, सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  8. मित्रता में अब नही वो बात है,

    दोस्त करता दोस्त से ही घात है,

    छल भरी उपकार की बातें करें।

    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।


    बेहद ख़ूबसूरत पंक्तियाँ शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  9. अब बनावट प्यार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।



    nice.......nice...........nice.......

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर ओर आज के हालात के अनुसार है आप की यह कविता, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. कामनाओं में लगी अब होड़ है,
    खाज मे उपजा हुआ अब कोढ़ है,
    गुम हुए त्योहार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।

    bilkul sahi kaha........har fasad ki jad kamna hi to hoti hai.........bahut sundar.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी रचना है। भाव, विचार और शिल्प सभी प्रभावित करते हैं। सार्थक और सारगर्भित प्रस्तुति ।

    मैने अपने ब्लग पर एक कविता लिखी है-रूप जगाए इच्छाएं-समय हो पढ़ें और कमेंट भी दें ।- http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

    गद्य रचनाओं के लिए भी मेरा ब्लाग है। इस पर एक लेख-घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं को तन और मन लिखा है-समय हो तो पढ़ें और अपनी राय भी दें ।-
    http://www.ashokvichar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  13. सब पुराने आशियाने ढह गये,
    होड़ में नूतन ठिकाने रह गये,
    मतलबी दिलदार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।
    बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने! लाजवाब!

    उत्तर देंहटाएं
  14. कामनाओं में लगी अब होड़ है,
    खाज मे उपजा हुआ अब कोढ़ है,
    गुम हुए त्योहार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।

    वाह शास्त्री जी, एक और प्रासंगिक और उम्दा रचना. साधू!!

    उत्तर देंहटाएं
  15. कामनाओं में लगी अब होड़ है,
    खाज मे उपजा हुआ अब कोढ़ है,
    गुम हुए त्योहार की बातें करें।
    प्रीत और मनुहार की बातें करें।।
    हमेशा की तरह सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं

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