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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

"माता मुझको भी तो अपनी दुनिया में आने दो!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

माता मुझको भी तो,
अपनी दुनिया में आने दो!
सीता-सावित्री बन करके, 
जग में नाम कमाने दो!


अच्छी सी बेटी बनकर मैं,
अच्छे-अच्छे काम करूँगी,
अपने भारत का दुनिया में
सबसे ऊँचा नाम करूँगी,
माता मुझको भी तो अपना, 
घर-संसार सजाने दो!
माता मुझको भी तो
अपनी दुनिया में आने दो!


बेटे दारुण दुख देते हैं
फिर भी इतने प्यारे क्यों?
सुख देने वाली बेटी के
गर्दिश में हैं तारे क्यों?
माता मुझको भी तो अपना
सा अस्तित्व दिखाने दो!
माता मुझको भी तो
अपनी दुनिया में आने दो!


बेटों की चाहत में मैया!
क्यों बेटी को मार रही हो?
नारी होकर भी हे मैया!
नारी को दुत्कार रही हो,
माता मुझको भी तो अपना
जन-जीवन पनपाने दो!
माता मुझको भी तो
अपनी दुनिया में आने दो!


20 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi samyik rachna............jagriti isi prakar aati hai ........bas prayas karte rahna chahiye........abhi is post se pahle kumarendra ji ki post bhi isi se related hai wo padhi..........ajab ittefaq raha dono hi post ek hi vishay par.

    उत्तर देंहटाएं
  2. माता मुझको भी तो अपना

    जन-जीवन पनपाने दो!
    " बेहद भावुक करती रचना, मन को छु गयी, एक बेटी का दर्द जेसे आँखों में तैर गया..."
    regards

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक अजन्मी बच्ची कि भावनाएं कह डालीं आपने..मर्मस्पर्शी कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेटे दारुण दुख देते हैं

    फिर भी इतने प्यारे क्यों?

    सुख देने वाली बेटी के

    गर्दिश में हैं तारे क्यों?

    माता मुझको भी तो अपना

    सा अस्तित्व दिखाने दो!

    माता मुझको भी तो

    अपनी दुनिया में आने दो!

    वाह मजा अ गया पढ़कर शास्त्री जी, बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना लिये हुये अनुपम प्रस्‍तुति, आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. माता मुझको भी तो
    अपनी दुनिया में आने दो!
    वाकई अजन्मी के पुकार को स्वर दिया है आपने खूबसूरती से

    उत्तर देंहटाएं
  7. माता मुझको भी तो,
    अपनी दुनिया में आने दो.
    सीता-सावित्री बन करके,
    जग में नाम कमाने दो.

    बहुत ही भावपूर्ण सुन्दर रचना आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत अच्छी रचना, बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  9. लाज़वाब प्रस्तुति शास्त्री जी ..आज के समाज का एक वो रूप जो भ्रूणहत्या में लिप्त है उनके लिए एक करूण पुकार...जाग जाओ ..बेटियाँ कही से भी बेटों से कम नही होती...बहुत बढ़िया गीत..धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर शब्दों के साथ बेहतरीन कविता....

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेटों की चाहत में मैया!
    क्यों बेटी को मार रही हो?
    नारी होकर भी हे मैया!
    नारी को दुत्कार रही हो,
    माता मुझको भी तो अपना
    जन-जीवन पनपाने दो!
    माता मुझको भी तो
    अपनी दुनिया में आने दो!


    bahut khub!!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. जिस घर में बिटिया का सम्मान न हो, वो घर घर नहीं भूतों के डेरे होते हैं...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं

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