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बुधवार, 9 दिसंबर 2009

"कवि त्रिलोचन को भाव-भीनी श्रद्धाञ्जलि" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज दिग-दिगन्त के कवि त्रिलोचन की पुण्य-तिथि है!
कवि त्रिलोचन सिंह का जन्म 20 अगस्त 1917 को उत्तरप्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कठघरा चिरानी पट्टी में हुआ था। इनका वास्तविक नाम वासुदेव सिंह था! बाबा नागार्जुन के समकालीन 91 वर्षीय त्रिलोचन पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे। कविता संग्रह  "ताप के ताए हुए दिन"  के लिए उन्हें 1981 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
जीवन के अन्तिम क्षणों मे  बाबा त्रिलोचन अपने पुत्र के वैशाली स्थित निवास पर गाजियाबाद में  ही थे। रविवार 9 दिसम्बर, 2007 को शाम साढ़े सात बजे इन्होंने अन्तिम साँस ली और प्रगतिशील हिन्दी कविता की अन्तिम कड़ी का सूर्य अस्त हो गया।




इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्न हैं:-
धरती, गुलाब बुलबुल, दिंगत, ताप के ताये हुए दिन, शब्द, उस जनपद का वासी हूं, तुम्हें सौंपता हूं, आत्मालोचन इत्यादि त्रिलोचन की प्रमुख रचनाएं हैं। वृहद हिन्दी कोष और हिन्दी-उर्दू कोष तैयार करने में बाबा के महत्वपूर्ण योगदान को तो कभी भुलाया ही नही जा सकता है। इसके साथ-साथ वे हिंदी दैनिक आज, जनवार्ता, साहित्यिक पत्रिका, हंस, कहानी, चित्रलेखा आदि से भी जुडे रहे। 

प्रस्तुत है काव्य के भास्कर कवि त्रिलोचन की एक कविता-
मित्रों, मैंने साथ तुम्हारा जब छोड़ा था
तब मैं हारा थका नहीं था, लेकिन मेरा



तन भूखा था मन भूखा था। तुम ने टेरा,
उत्तर मैं ने दिया नहीं तुम को : घोड़ा था


तेज़ तुम्हारा, तुम्हें ले उड़ा। मैं पैदल था,
विश्वासी था ‘‘सौरज धीरज तेहि रथ चाका।’’
जिस से विजयश्री मिलती है और पताका
ऊँचे फहराती है। मुझ में जितना बल था


अपनी राह चला। आँखों में रहे निराला,
मानदंड मानव के तन के मन के, तो भी
पीस परिस्थितियों ने डाला। सोचा, जो भी
हो, करुणा के मंचित स्वर का शीतल पाला


मन को हरा नहीं करता है। पहले खाना
मिला करे तो कठिन नहीं है बात बनाना।
कवि त्रिलोचन की पुण्य-तिथि पर 

न्हें भाव-भीनी श्रद्धाञ्जलि समर्पित करता हूँ। 



प्रख्यात  चित्रकार हरिपाल त्यागी मेरे अभिन्न मित्रों में से एक हैं। 
इनके बनाए हुए कवि त्रिलोचन के कुछ चित्र ये हैं-



आधारशिला प्रकाशन हल्द्वानी (नैनीताल) द्वारा सम्पादक दिवाकर भट्ट ने 
 "आधारशिला" का त्रिलोचन विशेषांक 2009 में प्रकाशित किया
इस अंक का सम्पादन हिन्दी के इंसाइक्लोपीडिया माने जाने वाले
श्री वाचस्पति ने किया और इस पत्रिका का आवरण व रेखांकन 
जाने-माने कवर-डिजाइनर श्री हरिपाल त्यागी ने किया है।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ! मेरी भी श्रदांजली कवी त्रिलोचन जी को !

    उत्तर देंहटाएं
  2. कवी त्रिलोचन जी को श्रदांजली!

    उत्तर देंहटाएं
  3. कवि त्रिलोचन जी को मैं श्रधांजलि अर्पित करती हूँ!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आदरणीय शास्त्री जी....

    सादर, नमस्कार
    व चरणस्पर्श...

    मैं आपसे हाथ जोड़ के माफ़ी मांग रहा हूँ. मुझसे गलती हुई जो मैंने ऐसी पोस्ट डाली, आपके समझाने के बावजूद मैंने वो पोस्ट रहने दी क्यूंकि काफी लोगों ने कहा कि अब उसे डिलीट करने का कोई मतलब नहीं है, तीर कमान से निकल चुका है, इसलिए उसे डिलीट नहीं किया. आपसे दोबारा इसलिए बात नहीं कर पाया क्यूंकि आपसे नज़र नहीं मिला पाया. जब एक बेटा गलती करता है और पिता उसको समझाता है और बेटा जब बात नहीं सुनता तो अंत में उसको पछताना ही पड़ता है, फिर बेटा पिता से नज़र नहीं मिला पाता है. मुझे माफ़ कर दीजियेगा , आइन्दा ऐसी गलती कभी नहीं होगी, यह मेरा आपसे वादा है. मैं अपना स्तर बनाये रखूँगा.

    अंत में ... कृपया इस बेटे कि पहली गलती समझ कर माफ़ कर दिज्यिएगा..... दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी.

    सादर

    महफूज़..







    कवी त्रिलोचन जी को श्रध्धांजलि..

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह शास्त्रीजी।
    आभार इस सामग्री के लिए जो त्रिलोचन जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आपने यहां उपलब्ध कराई। बाबा के रेखाचित्र बहुत अच्छे और प्रभावी हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. कवि त्रिलोचन को मेरा नमन और श्रधा सुमन अर्पित हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. *रेखांकन बहुत खूब
    * पोस्ट बहुत ही महत्वपूर्ण , यह पत्रिका 'आधा्रशिला' को खोजने / पढ़ने के लिए प्रेरित करेगी. कम से कम मुझे तो कर ही दिया इसने.
    उम्दा पोस्ट.
    * त्रिलोचन जी को नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  8. कवि त्रिलोचन जी की याद दिलाकर मुझे भावुक कर दिया है ! दिल्ली-प्रवास में उनके सान्निध्य का एक बड़ा टुकड़ा गुजारा था मैंने... दी गई सूचनाएं महत्त्व की हैं, रेखा-चित्रों में उनकी शक्ल की रेखाएं टटोलता हूँ...
    आभार !
    सदर--आनंद.

    उत्तर देंहटाएं
  9. मन को हरा नहीं करता है। पहले खाना
    मिला करे तो कठिन नहीं है बात बनाना।
    कवि त्रिलोचन की पुण्य-तिथि

    त्रिलोचन जी को श्रद्धांजलि!
    जानकारी, कविता और रेखाचित्रों के लिए धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

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