तब मैं हारा थका नहीं था, लेकिन मेरा
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बुधवार, 9 दिसंबर 2009
"कवि त्रिलोचन को भाव-भीनी श्रद्धाञ्जलि" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
तब मैं हारा थका नहीं था, लेकिन मेरा


kavi trilochan ji ko hamari bhi bhavbhini shraddhanjali.
जवाब देंहटाएंबहुत खूब ! मेरी भी श्रदांजली कवी त्रिलोचन जी को !
जवाब देंहटाएंhamari bhi shradhanjali Kavi Trilochan ji ko ...Abhar.
जवाब देंहटाएंकवी त्रिलोचन जी को श्रदांजली!
जवाब देंहटाएंकवि त्रिलोचन जी को मैं श्रधांजलि अर्पित करती हूँ!
जवाब देंहटाएंआदरणीय शास्त्री जी....
जवाब देंहटाएंसादर, नमस्कार
व चरणस्पर्श...
मैं आपसे हाथ जोड़ के माफ़ी मांग रहा हूँ. मुझसे गलती हुई जो मैंने ऐसी पोस्ट डाली, आपके समझाने के बावजूद मैंने वो पोस्ट रहने दी क्यूंकि काफी लोगों ने कहा कि अब उसे डिलीट करने का कोई मतलब नहीं है, तीर कमान से निकल चुका है, इसलिए उसे डिलीट नहीं किया. आपसे दोबारा इसलिए बात नहीं कर पाया क्यूंकि आपसे नज़र नहीं मिला पाया. जब एक बेटा गलती करता है और पिता उसको समझाता है और बेटा जब बात नहीं सुनता तो अंत में उसको पछताना ही पड़ता है, फिर बेटा पिता से नज़र नहीं मिला पाता है. मुझे माफ़ कर दीजियेगा , आइन्दा ऐसी गलती कभी नहीं होगी, यह मेरा आपसे वादा है. मैं अपना स्तर बनाये रखूँगा.
अंत में ... कृपया इस बेटे कि पहली गलती समझ कर माफ़ कर दिज्यिएगा..... दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी.
सादर
महफूज़..
कवी त्रिलोचन जी को श्रध्धांजलि..
naman hai.....
जवाब देंहटाएंवाह शास्त्रीजी।
जवाब देंहटाएंआभार इस सामग्री के लिए जो त्रिलोचन जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आपने यहां उपलब्ध कराई। बाबा के रेखाचित्र बहुत अच्छे और प्रभावी हैं।
कवि त्रिलोचन को मेरा नमन और श्रधा सुमन अर्पित हैं।
जवाब देंहटाएं*रेखांकन बहुत खूब
जवाब देंहटाएं* पोस्ट बहुत ही महत्वपूर्ण , यह पत्रिका 'आधा्रशिला' को खोजने / पढ़ने के लिए प्रेरित करेगी. कम से कम मुझे तो कर ही दिया इसने.
उम्दा पोस्ट.
* त्रिलोचन जी को नमन !
कवि त्रिलोचन जी की याद दिलाकर मुझे भावुक कर दिया है ! दिल्ली-प्रवास में उनके सान्निध्य का एक बड़ा टुकड़ा गुजारा था मैंने... दी गई सूचनाएं महत्त्व की हैं, रेखा-चित्रों में उनकी शक्ल की रेखाएं टटोलता हूँ...
जवाब देंहटाएंआभार !
सदर--आनंद.
मन को हरा नहीं करता है। पहले खाना
जवाब देंहटाएंमिला करे तो कठिन नहीं है बात बनाना।
कवि त्रिलोचन की पुण्य-तिथि
त्रिलोचन जी को श्रद्धांजलि!
जानकारी, कविता और रेखाचित्रों के लिए धन्यवाद!