"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

"द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")




जो भी मन में हो कह जाओ!
द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!


दूर-दूर रह कर, क्यों हल को खोज रहे हो,
मरुथल में जाकर क्यों जल को खोज रहे हो,
गंगा तट पर प्यास बुझाने,
गड़वा लेकर आ भी जाओ।
द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!


छलनी के छेदों मे तुम तो केवल अवगुण देख रहे हो,
 कूड़ा आँचल में रखते हो, सार-सार को फेंक रहे हो,
खुलकर के मन- सुमन मिलेंगे,
उपवन में अब आ भी जाओ।
द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!


क्षमा-सरलता गुण हैं, हैं ये मानव के आभूषण भी,
वायु करती प्राण-प्रवाहित और जगाती है दूषण भी,
मत देखो पुतले में अवगुण,
जीवन भरने आ भी जाओ!
द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!


14 टिप्‍पणियां:

  1. क्षमा-सरलता गुण हैं और हैं मानव के आभूषण भी,
    वायु करती प्राण-प्रवाहित और जगाती है दूषण भी,
    मत देखो पुतले में अवगुण,
    जीवन भरने आ भी जाओ!
    द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!

    बहुत सुंदर पंक्तियाँ......

    बहुत अच्छी लगी यह कविता ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. जो भी मन में हो कह जाओ!
    द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!

    आ गया आपके ब्लॉग पर और कविता भी पढ़ी और ये भी कहना पढ़ की बहुत बढ़िया कविता लिखी है आपने..
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत प्रवाहमयी उम्दा गीत...दिल को छू गया!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. जो भी मन में हो कह जाओ!
    द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!

    बेहद खूब छंद शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  5. द्वार खुले हैं आ भी जाओ, अच्‍छी सात्विक रचना है। नेह निमन्‍त्रण के बाद भी लोग मन की गांठे नहीं खोलते। न जाने कितने मुखौटे चढ़ाकर घूमते हैं लोग। अच्‍छी रचना के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. द्वार खुले थे, हम आ गये। अब चूंकि खुले हैं, इसलिए टिप्पणी करके वापस भी जा रहे हैं।
    द्वार खुले रखने का शुक्रिया।
    ------------------
    अदभुत है मानव शरीर।
    गोमुख नहीं रहेगा, तो गंगा कहाँ बचेगी ?

    उत्तर देंहटाएं
  7. shastri ji
    sabse pahle to shadi ki 36 vi salgirah ki haradik shubhkamnayein.ye 36 badhkar 63 aur phir 93 then 96 aur phir shatak bane .

    HAPPY ANNIVERSARY

    kavita to hamesha ki tarah ati uttam.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीय शास्त्री जी विवाह के ३६ वी वर्षगान्ठ पर मेरी हार्दिक शुभकामना स्वीकार करे, ईश्वर आप दोनो को दीर्घायु दे.

    आपके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ .

    सुन्दर कविता

    सादर
    राकेश

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय शास्त्री जी को वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक बधाइयाँ...!!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. आदरणीय शास्त्री जी विवाह के ३६ वी वर्षगान्ठ पर मेरी हार्दिक शुभकामना स्वीकार करे, ईश्वर आप दोनो को दीर्घायु दे.

    आभार
    ==========================================

    मुम्बई ब्लोगर मीट दिनाक ०६/१२/२००९ साय ३:३० से
    नेशनल पार्क बोरीवली मुम्बई के त्रिमुर्तीदिगम्बर जैन टेम्पल
    मे होनॆ की सुचना विवेकजी रस्तोगी से प्राप्त हुई...
    शुभकामानाऎ
    वैसे मै यानी मुम्बई टाईगर इसी नैशनल पार्क मे विचरण करते है.

    ===========================================
    जीवन विज्ञान विद्यार्थीयों में व्यवहारिक एवं अभिवृति परिवर्तन सूनिशचित करता है
    ************************
    ताउ के बारे मे अपने विचार कुछ इस तरह
    **********************
    ब्लाग चर्चा मुन्नाभाई सर्किट की..
    *********************

    उत्तर देंहटाएं
  11. शास्त्री जी वैवाहिक वर्षगाँठ पर हमारी तरफ़ से हार्दिक बधाइयाँ, बहुत सुंदर रचना,

    उत्तर देंहटाएं
  12. विवाह की वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई। आज तो दोनों की एक फोटो साथ-साथ लगनी चाहिए थी।

    उत्तर देंहटाएं
  13. जो भी मन में हो कह जाओ!
    द्वार खुले हैं, आ भी जाओ!!
    बहुत ही सुन्‍दर दिल को छूते शब्‍द बेहतरीन रचना ।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails