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शनिवार, 13 अक्तूबर 2012

" कुछ प्यार की बातें करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


ज़िन्दगी के खेल में, कुछ प्यार की बातें करें।
प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।।

नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,
छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें।

आस के अंकुर उगाओ, अब सुमन के खेत में,
प्रीत का संसार है, शृंगार की बातें करें।

भावनाओं के नगर में, गीत खुलकर गुनगुनाओ,
रूठने की रीत में, मनुहार की बातें करें।

कदम आगे तो बढ़ाओ, सामने मंजिल खड़ी,
जीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करें।

थाल पूजा का सजाकर, वन्दना के साथ में,
दीन-दुखियों के सदा, उद्धार की बातें करें।

आए जब भी पर्व कोई, प्यार से उपहार दें,
छोडकर शिकवे-गिले, त्यौहार की बातें करें।

कामकाजी हो अगर तो, घर न लाओ काम को,
मिलके घर-परिवार में, परिवार की बातें करें।

रूप है नश्वर सभी का, चार दिन की चाँदनी।
छोड़कर इन्कार को, इक़रार की बातें करें।

17 टिप्‍पणियां:

  1. सुलझी सुलझी प्यार की बातें,
    अपनों के संसार की बातें ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रूप” है नश्वर सभी का, चार दिन की चाँदनी।
    छोड़कर इन्कार को, इक़रार की बातें करें।
    ..बहुत बढ़िया
    सच जिंदगी में प्यार नहीं तो जिंदगी बेकार ही समझो ..

    उत्तर देंहटाएं
  3. बोलो कैसे करूँ मैं, प्रकट पूर्ण अनुराग ।

    नियत करे सरकार जब, वेतन का लघु भाग ।

    वेतन का लघु भाग, अभी तक पूरा वेतन ।

    पायी बिन खटराग, लुटाई अपना तन-मन ।

    कर के प्रेमालाप, जहर अब यूँ नहिं घोलो ।

    कर दूंगी झट केस, अकेले में गर बोलो ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर शास्त्री सर !
    चार दिन की ज़िंदगी है...जी भर जियो और जीने दो..
    खार सारे चुन लें आओं ... बहार की बातें करें. ....
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आए जब भी पर्व कोई, प्यार से उपहार दें,
    छोडकर।।।।।(छोड़कर)....... शिकवे-गिले, त्यौहार की बातें करें।

    हर तरफ आलम है भ्रष्टाचार का ,

    मुस्कुराता है ,छद्मी पैरहन ,
    ऐसे में कौन से मयार की बातें करें ,

    हार की बातें नहीं ,तकरार की बातें हैं ये ,

    चिरकुटी माहौल में अब कौन सी बातें करें .

    आपकी रचना में कोमल भाव है, हैं बहुत माहौल में झर्बेरियाँ ,

    ऐसे में कोई बताओ! प्यार की बातें करें ?

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्यार की बातें करें...ज़िन्दगी में इसके अलावा कुछ भी नहीं है...

    उत्तर देंहटाएं
  9. आस के अंकुर उगाओ, अब सुमन के खेत में,
    प्रीत का संसार है, शृंगार की बातें करें।

    भावनाओं के नगर में, गीत खुलकर गुनगुनाओ,
    रूठने की रीत में, मनुहार की बातें करें।
    बेहद सुन्दर ....प्यार की बातें ..स्नेहिल संसार की बातें....सादर अभिनन्दन !!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. कदम आगे तो बढ़ाओ, सामने मंजिल खड़ी,
    जीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करें।

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,,,,,,

    MY RECENT POST: माँ,,,

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह बहुत खूब ......बस प्यार ही प्यार

    उत्तर देंहटाएं

  12. 'कामकाजी हो अगर तो, घर न लाओ काम को,
    मिलके घर-परिवार में, परिवार की बातें करें।'
    - यह हुई नीति की बात !

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत खूब शास्त्री साहब... हमेशा की तरह शानदार...

    उत्तर देंहटाएं
  14. “रूप” है नश्वर सभी का, चार दिन की चाँदनी।
    छोड़कर इन्कार को, इक़रार की बातें करें।
    सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई खूबसूरत रचना |

    उत्तर देंहटाएं

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