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बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

"रूप छलता रहा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मखमली ख्वाब आँखों में पलता रहा।
मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।

अश्क मोती बने मुस्कुराने लगे,
सारे सोये सुमन खिलखिलाने लगे,
सुख सँवरता रहा, दर्द जलता रहा।
मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।

तुम जो ओझल हुए अटपटा सा लगा,
जब दिखाई दिये चटपटा सा लगा,
ताप बढ़ता रहा, तन सुलगता रहा।
मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।

उर के मन्दिर में ही प्रीत पलती सदा,
शैल-शिखरों से गंगा निकलती सदा,
स्वप्न मेरा हकीकत में ढलता रहा।
मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।

आज फिर से सितारों भरा है गगन,
कितना निखरा हुआ, चन्द्रमा का बदन,
चाँदनी का हमें. रूप छलता रहा।
मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।


14 टिप्‍पणियां:

  1. सुबह सवेरे ओस भी, बनती गंगा धार ।

    बहा रहे गुरुवर यहाँ, पावन छंद बयार ।

    पावन छंद बयार, बड़ी आकर्षक दीखे ।

    नव-कवि कुल आ जाव , यहाँ कविताई सीखे ।

    छले नहीं यह रूप, धूप चहुँ ओर बिखेरे ।

    रविकर गुरुकुल जाय, आज तो सुबह सवेरे ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर ... मन मृदुल मोम सा पिघलता रहा ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,लाजबाब ,,,,,

    RECENT POST LINK...: खता,,,

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह वाह वाह वाह बहुत सुन्दर रचना दिल को छू गयी।

    उत्तर देंहटाएं
  6. उर के मन्दिर में ही प्रीत पलती सदा,
    शैल-खिखरों से गंगा निकलती सदा,
    स्वप्न मेरा हकीकत में ढलता रहा।
    मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा ... आपकी लेखनी एक पुरस्कार है

    उत्तर देंहटाएं
  7. चाँदनी का हमें. “रूप” छलता रहा।
    इसी छलने से ही दुनिया चल रही है

    उत्तर देंहटाएं
  8. चाँदनी का हमें. “रूप” छलता रहा...अद्भुत शब्द संयोजन...

    उत्तर देंहटाएं
  9. हृदय धड़कन, काश चेहरे से टपकती।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अश्क मोती बने मुस्कुराने लगे,
    सारे सोये सुमन खिलखिलाने लगे,
    सुख सँवरता रहा, दर्द जलता रहा।
    मन मृदुल मोम सा बन पिघलता रहा।।
    बहुत ही बढिया ... आपकी लेखनी को नमन

    उत्तर देंहटाएं
  11. तुम जो ओझल हुए अटपटा सा लगा,
    जब दिखाई दिये चटपटा सा लगा,

    बहुत ही उम्दा..सच्ची में ... बहुत अच्छी लगी.

    आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत हैं।
    अगर आपको अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़ें।
    धन्यवाद !!

    http://rohitasghorela.blogspot.com/2012/10/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही सुन्दर ,खुबसूरत गजल..
    मनभावन...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

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