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शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

"दरख़्त का पीला पत्ता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


पागल तो हो सकता हूँ, 
पर डरा हुआ नही हो सकता।
निद्रा में हो सकता हूँ, 
पर मरा हुआ नही हो सकता।।

जो परिवेशों में घटता है,
उसको ही मैं गाता हूँ।
गूँगे-बहरे से समाज को,
लिख-लिखकर समझाता हूँ।।
अच्छा तो हो सकता हूँ,
पर बहुत बुरा नही हो सकता।।

मैं दरख़्त का पीला पत्ता,
मद्धम सुर में गाता हूँ।
भोजन का अम्बार लगा है,
फिर भी मैं नही खाता हूँ।।
सूखा तो हो सकता हूँ,
पर पुनः हरा नही हो सकता।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. प्राणवायु देता रहा, दिया सदैव सुकून |
    सूखे पीला पात अब, जय जय *अफलातून |
    *प्रसिद्ध दार्शनिक

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो नहीं डरा ...जीवन उसी का है
    सूख भी जाये तो देने की क्षमता बनी रहती है

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह ...
    बहुत सुन्दर रचना...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  5. गहरे भाव दर्शाती रचना .....
    शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. दरख्त का पीला पत्ता पुन :अपनी खाद बन जाता है .कार्बन साइकिल में समाहित हो जाता है .खुद अपना भोजन बनातें हैं वृक्ष .देते ही हैं ता -उम्र लेते कुछ नहीं ,हरे रहें या पीले .शास्त्री जी संबोधन में जैसे -भाइयो !

    और बहनो! में अनुनासिक का प्रयोग नहीं किया जाता है .वैसे ही आओ बच्चो !होना चाहिए -गीत बच्चों की रेलगाड़ी में .आभार .हमारे मित्र डॉ .वागेश मेहता भाषा के आचार्य है सारा काम भाषा पर है डी .लिट,उनसे



    अकसर चर्चा होती रहती है ब्लॉग जगत में पसरे वर्तनी युद्ध के बाबत .हम उन्हीं के तोते हैं .हर पल सीखने की ललक है जानकारी बांटने के निमित्त ही होती है .पुनश्च :आभार .आपका पात्र हमेशा भरा रहता है फिर

    भी आप लेने में भी संकोच नहीं करते यही आपका बड़प्पन और पल्लवन है .इसीलिए आपसे विमर्श चलता रहता है अप्रत्यक्ष .
    पीला पात बहुत बढ़िया रचना है .

    उत्तर देंहटाएं
  7. मैं दरख़्त का पीला पत्ता,
    मद्धम सुर में गाता हूँ।


    वाह बहुत ती सुंदर पंक्‍ति‍यां हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. कल 28/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, शुभकामनाएं.

    रामराअम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत नाजुक भावपूर्ण कविता |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  11. पीला पत्ता फिर से हरा भले न हो सके लेकिन धरा पर गिर कर माटी को नव उर्जा प्रदान कर अपने अस्तित्व को सार्थक कर जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. दुःखी तो हो सकते हैं, पर निराश नहीं हो सकते...
    वो सुबह कभी तो आयेगी... :)

    उत्तर देंहटाएं

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